पैसा की चाहत ॥

पैसे की चाहत ने ॥

मन तो मेरा कोमल था ॥

तेरी चाहत ने खुदगरज बना दिया  ॥

हर रिश्ता अपना सा था ॥

बेगाना बना दिया ॥

शान्ति,नीद अपनी थी ॥

पर बीमारी के सग जीना सीखा दिया।

अकेला हूँ  आज हर अहसास  से ॥

तेरी चाहत ने अहपाईज बना दिया ॥

 

रेनुका गोयल ॥

Comments

2 responses to “पैसा की चाहत ॥”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Nice

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