लंबी इमारतों से भी बढकर, कचरे की चोटी हो जाती है

जिंदगी की सुंदर प्लास्टिक, कचरें में बदल जाती है
अगर यूज न हो ढंग से, ऐसे ही जल जाती है

कभी कभी जिंदगी से बढी मौत हो जाती है
जिंदगी कभी कभी पानी में भी जल जाती है|

कुछ को तो कचरे फैलाने से फ़ुरसत नहीं
कुछ की तो जिंदगी कचरें में गुजर जाती है|

फैलती हुई दुनिया में, जिंदगी कहीं सिमटी सी है
लंबी इमारतों से भी बढकर, कचरे की चोटी हो जाती है|

Comments

7 responses to “लंबी इमारतों से भी बढकर, कचरे की चोटी हो जाती है”

    1. Sridhar Avatar
      Sridhar

      shukriya shakun ji

  1. Abhishek kumar

    Awesome

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