Author: Sridhar

  • माटी मेरी प्रीत की

    माटी मेरी प्रीत की पल पल पक्की होती जाये
    देख जीत मेरी प्रीत की, तेरा रंग क्यों फीका पड़ता जाये

  • इक लौ जलाकर आया हूं अंधेरों में कहीं

    इक लौ जलाकर आया हूं अंधेरों में कहीं
    ख्वाहिश है के वो कल तक सूरज बन जाये

  • श्रीधर सनकी

    मैं हूं मनमौजी, बात कहूं मैं मन की
    सीधी सपाट कहता है, श्रीधर सनकी

  • माँ का आंचल

    अपने आंचल की छाओं में,
    छिपा लेती है हर दुःख से वोह

    एक दुआ दे दे तो
    काम सारे पूरे हों…

  • गुजर गये

    दिन कुछ लम्हों आड़ में गुजर गये
    हम आपके इश्क की आड़ में गुजर गये

  • मुठ्ठी में तकदीर

    मुठ्ठी में तकदीर

    मुठ्ठी में तकदीर है मेरी, मेरे वतन की
    कर ले कोई कितनी भी कोशिश
    मिटा नहीं सकता|

    क्या करेगा वो इन्सान आखिर
    जो देश का राष्टगान भी
    गा नहीं सक्ता||

  • लंबी इमारतों से भी बढकर, कचरे की चोटी हो जाती है

    लंबी इमारतों से भी बढकर, कचरे की चोटी हो जाती है

    जिंदगी की सुंदर प्लास्टिक, कचरें में बदल जाती है
    अगर यूज न हो ढंग से, ऐसे ही जल जाती है

    कभी कभी जिंदगी से बढी मौत हो जाती है
    जिंदगी कभी कभी पानी में भी जल जाती है|

    कुछ को तो कचरे फैलाने से फ़ुरसत नहीं
    कुछ की तो जिंदगी कचरें में गुजर जाती है|

    फैलती हुई दुनिया में, जिंदगी कहीं सिमटी सी है
    लंबी इमारतों से भी बढकर, कचरे की चोटी हो जाती है|

  • आया खत मेरे इश्क का आज

    आया खत मेरे इश्क का आज
    सिर्फ़ पता था मेरा, और कुछ नहीं|

  • मुन्तजिर हूं मैं मोहब्बत का

    मुन्तजिर हूं मैं मोहब्बत का
    मयखानों की मुझे तलाश नहीं
    इक दरिया है जिसे मैं ढ़ूढ़ता हूं
    पैमानों के जामों की मुझे प्यास नहीं

  • आज कोई भी ले जाये मुझे मै चला जाऊंगा

    आज कोई भी ले जाये मुझे मै चला जाऊंगा
    इस दुनिया से लेना देना नही अब से कुछ

  • ज़हर इस तरह घुला जिंदगी में

    ज़हर इस तरह घुला जिंदगी में
    हर गूंठ में मुहं कढवा होता गया|
    बारिशों का तो आना जाना नहीं अरसे से
    सूखे से रिश्ता हमारा होता गया||

  • दीवाना

    उनकी गली से जो गुजरे वो दीवाना हो जाता है
    भटक जाता है वो, मजनू हो जाता है
    हम भी गुजरे थे इक दफ़ा उनकी गली से
    आज तक भटक रहे है, न उनकी खबर है
    और न खुद की|

  • इक जमाना था, जब हम सब के हुआ करते थे

    इक जमाना था, जब हम सब के हुआ करते थे
    आज हर कोई हमें अपना कहने से कतराता है|

  • कैसी है ये आजादी

    कैसी है ये आजादी

    थप थप की आवाज से अचानक मैं चोंक गया
    इक मासूम सा बच्चा खड़ा था,
    मेरी कार के बाहर
    अपने कुछ तिरंगो के साथ
    बेचना चाहता था शायद
    कमाना चाहता था
    कुछ पैसे अपनी मां के लिए
    या फिर अपनी बहिन को राखी पर कुछ देने के लिए

    आजादी के मायने मैं जान नहीं पाता हूं
    किसको है यहां आजादी?
    कैसी है ये आजादी?
    किसी की आजादी छीनने की आजादी?
    या फिर किसी का शोषण करने की आजादी?
    वो बच्चा, जिसे किसी स्कूल की परेड में भाग लेना था,
    वही रोटी की खातिर
    सड़क पर झंडे बेच रहा है
    आजादी के लिए जान गवानें वालों का सपना
    आज सरे आम रो रहा है
    भारत का भविष्य बीच सड़क पर
    सस्ती कीमतों में बिक रहा है

  • आस उनके आने की

    आस उनके आने की कभी खत्म नहीं होती
    जिद उनके आने की कभी खत्म नहीं होती

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