उम्र लग गई

ख्वाब छोटा-सा था, बस
पूरा होने मे उम्र लग गईं!

उसके घर का पता मालूम था , बस
उसे ढूंढने मे उम्र लग गईं !

ख़त तो उसने भी लिखे थे, बस
मेरा नाम लिखने मे उम्र लग गईं !

दूर तो ना थे हम एक-दूसरे से, बस
नजदीकियों का अहसास होने मे उम्र लग गईं !

ख्वाब छोटा-सा था, बस
पूरा होने मे उम्र लग गईं !

इंतजार तो उसे भी था मेरा, बस
उसे इजहार करने मे उम्र लग गईं !

रोया तो वो भी था ऱज के मुझसे बिछड़कर, बस
आँखों के पानी को अश्क बनने मे उम्र लग गईं !

यू तो मेरा वक्त बदल गया, बस
उसे बदलने मे उम्र लग गईं !

ख्वाब छोटा-सा था, बस
पूरा होने मे उम्र लग गईं!

Comments

7 responses to “उम्र लग गई”

  1. Puneet Sharma Avatar
    Puneet Sharma

    achhi kavita h.. bahut bahut shubhkamnayein

  2. Kumar Bunty Avatar
    Kumar Bunty

    LAAZWAB

  3. Abhishek kumar

    Good

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