छुपा लूँ क्या

तेरी आँखों के बिस्तर पर अपने प्यार की चादर बिछा दूँ क्या?
तेरे ख़्वाबों के तकिये के सिरहाने मैं सर टिका लूँ क्या?
कर दूँ मैं मेरे दिल के जज़्बात तेरे नाम सारे,
दे इजाज़त के तेरी आँखों से मेरी आँखें मिला लूँ क्या?
अच्छा लगता है मुझे तेरी पलकों का आँचल,
तू कहे तो खुद को इस आँचल में छुपा लूँ क्या?
राही (अंजाना)

Comments

7 responses to “छुपा लूँ क्या”

    1. Shakun Avatar

      धन्यवाद

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. Abhishek kumar

    Nice

  3. Pratima chaudhary

    बहुत खूब

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