उसने बेबुनियाद इल्जामों की मुझपर फहरिस्त लगा दी, जीवन कटघरे को मानों जैसे हथकड़ी लगा दी, छटपटाते रहे मेरे जवाब किसी मछली से तड़पकर, और सवालों की उसने मानों कीलें सी चुभा दी, बेगुनाह था […]

बड़े इत्मिनान से मेरे जहन में कुछ सवाल रक्खे थे, हो जाने को ज़माने से रूबरू मेरे खयाल रक्खे थे, बड़ी बेचैनी से एक नज़र जब पड़ी उनकी हम पर, खुद को यूँ लुटा बैठे […]

देखकर जिसको जुड़ जाते हैं हाँथ अक्सर, आज वही फैला कर दोनों हाँथ बैठी है, झुकाकर निकलते हैं हम जिसके आगे सर अपना, आज वही सरेबाजार सर झुकाकर बैठी है, टूटने नहीं देती है जो […]

जो करता रहा इंतज़ार पल पल, आज हर पल का वो हिसाब माँगता है, दिल के रिश्तों की कीमत और प्यार का खिताब माँगता हैं, कितना बदल गया है वो, हर बात पर अब ईनाम […]

जाने कब से हैं मेरी आँखों में, ये ख्वाब किसके हैं मेरी आँखों में। मैं तो सूखा हुआ सा दरिया था, ये मौज किसकी है मेरी बाहों में।। मैं तो सोया था तन्हा रातों में, […]

बहुत ही बखूबी से तुमने मुझे नज़रन्दाज़ किया, जानते हुए भी मुझको क्यूँ अनजान किया, जब खामोश मोहब्बत ही हमारी जुबान थी, तो क्यों रिश्तों को अपने यूँ अज़ान किया॥ To be cont.. राही (अंजाना)

ममता के आइने मे प्यारी सी सूरत है माँ, सूरज की धूप मे छाया का आँचल है माँ, दुखों के समन्दर में सुख का किनारा है माँ, दुनियॉ की भीड़ में सकून का ठिकना है […]

तेरी आँखों के बिस्तर पर अपने प्यार की चादर बिछा दूँ क्या? तेरे ख़्वाबों के तकिये के सिरहाने मैं सर टिका लूँ क्या? कर दूँ मैं मेरे दिल के जज़्बात तेरे नाम सारे, दे इजाज़त […]

मिल जायेगी ताबीर मेरे ख्वाबों की एक दिन, या ख्वाब बिखर जायें कुछ कह नहीं सकता। बह जाउं समंदर में तिनके की तरहं या फ़िर, मिल जाये मुझे साहिल कुछ कह नहीं सकता। इस पार […]

न ये ज़ुबाँ किसी की गुलाम है न मेरी कलम को कोई गुमान है, छुपी रही बहुत अरसे तक पहचान मेरी, आज हवाओं पर नज़र आते मेरे निशान है, जहाँ खो गईं हैं मेरे ख़्वाबों […]

माँ के लिया बहुत सुना पढ़ा लिखा है सभी ने। कुछ पंक्तियाँ पापा के नाम। छुटपन से हर रोज पापा मेरे मुझे टहलाने ले जाते रहे, ऊँगली पकड़ कर मेरी मुझे वो रास्ता दिखाते रहे, […]

टूट कर ही जुड़ा हूँ यूँही नहीं बना हूँ मैं, गिरा हूँ सौ बार फिर सौ बार उठा हूँ, यूँही नहीं सीधा खड़ा हूँ मैं, बिखरा हूँ कभी सूखे पत्तों की तरह, तो काटों सा […]

। भगत सिंह और राजगुरु के संघर्षों बलिदानों की, ये धरती है वीर बहादुर चौड़ी छाती वालों की, ब्रिटिश राज को धूमिल कर मिट्टी में मिलाने वालों की, माँ के आँचल को छोड़ तिरंगे की […]

चील और कौवो सा नोचता रहता संसार है, ये कैसा चोरों का फैला व्यापार है, दहेज के नाम पर बिक रही हैं नारियाँ कैसे, ये कैसा नारियों को गिरा कर झुका देने वाला हथियार है, […]

भगत सिंह, शिव राज गुरु, सुखदेव सभी बलिदान हुए, इस धरती माँ की खातिर कितने ही अमर नाम हुए, ब्रिटिश राज की साख मिटाने को एक जुट मिटटी के लाल हुए, कभी सीने पर गोली […]

रंग गुलाल के बादल छाये रंगो में सब लोग नहाये देवर भाभी जीजा साली करें ठिठोली खेलें होली बोले होली है भई होली खायें गुजिया और मिठाई घुटे भांग और पिये ठंडाई गले मिलें जैसे […]

होली पे मस्तों की देखो टोली चली, रँगने को एक दूजे की चोली चली, भुलाकर गमों के भँवर को भी देखो, आज गले से लगाने को दुनीयाँ चली, हरे लाल पिले गुलाबी और नीले, अबीर […]

लगाकर टकटकी मैं किसी के इंतज़ार बैठा हूँ, भिगा देगी जो मुझ किसान की धरती मैं उसी के एहतराम में बैठा हूँ, बेसर्ब बंज़र सी पड़ी है मेरे खेतों की मिट्टी, मैं आँखों में हरियाले […]

देख लूँ एक बार इन आँखों से बारिश को, तो फिर इन आँखों से कोई काम नहीं लेना है, बंजर पडे मेरे ख़्वाबों की बस्ती भीग जाए एक बार, तो फिर इस बस्ती के सूखे […]

यूँ तो हर रोज गुजर जाते हैं कितने ही लोग करीब से, पर नज़र ही नहीँ मिलाते कोई इस बचपन गरीब से, रखते हैं ढककर वो जो पुतले भी अपनी दुकानों में, वो देखकर भी […]

दे कर मिट्टी के खिलौने मेरे हाथ में मुझे बहकाओ न तुम, मैं शतरंज का खिलाड़ी हूँ सुनो, मुझे सांप सीढ़ी में उलझाओ न तुम, जानता हूँ बड़ा मुश्किल है यहाँ तेरे शहर में अपने […]

किसी आयत की तरह रात दिन गुनगुनाता रहा हूँ तुझे, सबकी नज़रो से बचाकर अपनी पलकों में छिपाता रहा हूँ तुझे, मेरे हर सवाल का जबाब तू ही है मगर, फिर भी एक उलझे सवाल […]

गुजरता रहा उसकी आँखों से हर रात किसी भरम सा मैं, फिर एक रोज़ खुद ब खुद उसके ख्वाबों से बाहर निकल आया मैं, छुप कर बैठा रहा मैं एक झूठ की आड़ में बरसों, […]

बेशक छोड़ दे मगर खुद से मुझे कुछ इस तरह जोड़ कर जा, के भले आसमाँ न रहे मेरे हाथों की पहुंच में मगर अपने आँचल की ज़मी मेरे पैरों में छोड़ कर जा, सूखा […]

वही चाय के दो कप और एक प्लेट लौटा दे, कोई तो तेरे साथ बीते पलों को वापस लौटा दे, एक चाय के कप का बना कर झूठा बहाना, वो तेरा रोज रोज मेरे घर […]

तेरे साथ बिताई मस्ती और चाय की वो चुस्की याद आई है, लो आज फिर से बीते लम्हों की एक बात याद आई है, तेरे साथ बैठ कर जो बनाई थी बातें, उन बातों से […]

अपनी पलकों के बिस्तर पर मैं तुझको हर रोज सुलाता हूँ, तू जग न जाए कहीं इस डर से पलकों को ज़रा धीरे झपकाता हूँ, तेरे संग ही मैं अपने सभी ख़्वाबों को सजाता हूँ, […]

आंधी और तूफानों में भी डटे रहते हैं, हम वो हैं जो हर मौसम में खड़े रहते हैं, उखड़ते हैं तो उखड़ जायें पेड़ और पौधे जड़ों से, हम तो वो हैं जो देश की […]

हाथ में हथियार और दिल को फौलाद किये बैठे हैं, सरहद के हर चप्पे पर हम बाज की नज़र लिये बैठे हैं, जहाँ सो जाता है चाँद भी चैन से हर रात में, वहीं खुली […]

माँ की गोद छोड़, माँ के लिये ही वो लड़ते हैं, हर पल हर लम्हां वो चिरागों से कहीं जलते हैं, भेजकर पैगाम वो हवाओं के ज़रिये सपनों में अपनी माँ से मिलते हैं, हो […]

बर्बाद कर बैठ जाते हैं अक्सर वो चेहरे हसीन होते हैं, पर अंधेरों की सरपरस्ती में ही वो खुद का वजूद लिए होते हैं, अब क्या बद्दुआयें दें हम उन आइना ऐ हुस्नों को, जो […]

अँधेरे कमरे से बाहर अब मैं निकलना चाहती हूँ, माँ की नज़रों में रहकर अब मैं बढ़ना चाहती हूँ, धुंधली न रह जाए ये जिन्दगी मेरी, यही वजह है के मैं अब पढ़ना चाहती हूँ, […]

सोये होते तो उठ जाते बेहोश हैं लोग अभी उठाने में ज़रा समय लगेगा, गहरे हैं रिश्ते मगर फिर भी दूरियां हैं, बीच में हैं खड़ी दीवारों को गिराने में ज़रा समय लगेगा।। आँखों में […]

रक्खे तो हैं कुछ टुकड़े सम्भाल कर, प्यारे से दिल के चन्द हिस्से सम्भाल कर, बनाते थे लोग पल पल बात कई, आज बस छिपा के रक्खे हैं कुछ किस्से सम्भाल कर, बहुत सारे तोहफा […]

बचपन से ही सहती हूँ, मैं सहमी सहमी रहती हूँ, छुटपन में कन्या बन कर संग माँ के मैं रहती हूँ, पढ़ लिखकर मैं कन्धा बन परिवार सम्भाले रखती हूँ, फिर छोड़ घोंसला अगले पल […]

माँ की कोख में ही दबा देते हो, मुझको रोने से पहले चुपा देते हो, आँख खुलने से पहले सुला देता हो, मुझको दुनियां की नज़र से छुपा देते हो, रख भी देती हूँ गर […]

कन्या बचाओ खुद कन्या कहती है- मुझको बचाओ तुम मुझको बचाओ, सपना नहीं अब हकीकत बनाओ, बेटा और बेटी का फर्क मिटाओ, बेटी बचाओ अब बेटी पढ़ाओ, बेटे के प्रति प्यार और बेटी को समझें […]

तेरी काया नहीं तो तेरा साया ही सही कुछ तो है जो मेरे साथ बाकी है, कभी मेरे ख़्वाबों में तेरे अक्स का मुझे छू कर चले जाना, तो कभी तेरे संग बीते लम्हों का […]

अपनी हथेली पर शहीदों के नाम की मेंहदी रचाता रहा हूँ मैं, तिरंगे के रंग में शहादत का रंग मिलाता रहा हूँ मैं, हार कर सिमट जाते हैं जहाँ हौंसले सभी के, वहीं हर मौसम […]

काश सपना मेरा ये हकीकत हो जाए, मैं बाहर और तू यूँही अंदर हो जाए, रख कर बर्तन में तुमने मुझे बहुत सताया है, अब तुमको भी सताने की कुछ खुरापात हो जाए, खेले हो […]

बन्द मुट्ठी में कई राज़ दबाये बैठा हूँ, अनगिनत शहीदों के कई नाम छुपाये बैठा हूँ, मेरी खातिर होती रही हैं कितनी ही कुर्बानी, मैं बेज़ुबान सही पर हर जवान की पहचान सजाये बैठा हूँ, […]

मैं हक़ीक़त में आजादी का एहसास करने ही लगा था के बस। फिर से मुझे ज़ंजीरों में जकड़ा जाने लगा।। आ ही गया था के वो लम्हा ए इमकान (सम्भावना) खुशनसीब, के बस यह एक […]

रंग हैं विभिन्न देखो फिर भी एक नाम है, एक ही है माटी अपनी एक ही तो शान है, बीच में चक्र जो वो जीत का अभिमान है, मुठ्ठी में है बन्द जो तिरंगा अपनी […]

तू जला कर मुझे धुंए के छल्ले बना कर खुश है, तो मैं भी खुश हूँ हर रोज तुझे झुलसता देख कर, तू सुलगाकर मुझे दे रहा है हर लम्हा हवा, तो मैं भी निगल […]

शब्दों में नहीं तो खामोशी ही सही, किसी ज़ुबां में तो तू निकल कर सामने आ, कब तलक छुपता रहेगा तू राज़ अब दिल में, खुल कर अब किसी सच सा तू निकल कर सामने […]

सबके ज़हन में आने की ये तरकीब निकाली हमने, के खुद ही के लापता होने की खबर फैला डाली हमने, बिक गया जब हर ज़रा ज़मी पर कुछ खाली न बचा, छोड़ कर ज़मी चाँद […]

जब सुनाई नहीं देती यहाँ किसी को चीख भी किसी की, तो कौन सुनकर आऐगा आगे यहाँ अब खामोशी की आवाज तेरी, जिस तरह मुश्किल है बहती हवा को छू पाना, उसी तरह मुम्किन नहीं […]

सिर्फ देख लूँ एक बार उसे करीब से, फिर इन हाथों में मैंने कोई जाम नहीं लेना है॥   छलक जाए गर मेरी आँखों से अश्क तो समझ लेना, उसी ने कहा था के मेरा […]