saavan

इलज़ाम

उसने बेबुनियाद इल्जामों की मुझपर फहरिस्त लगा दी, जीवन कटघरे को मानों जैसे हथकड़ी लगा दी, छटपटाते रहे मेरे जवाब किसी मछली से तड़पकर, और सवालों की उसने मानों कीलें सी चुभा दी, बेगुनाह था मगर फिर भी खामोशी साधे रहा, मग़र उसने तो सारे लहजों की धज्जियाँ उड़ा दी॥ राही (अंजाना) »

सरेआम रक्खे हैं।

बड़े इत्मिनान से मेरे जहन में कुछ सवाल रक्खे थे, हो जाने को ज़माने से रूबरू मेरे खयाल रक्खे थे, बड़ी बेचैनी से एक नज़र जब पड़ी उनकी हम पर, खुद को यूँ लुटा बैठे जैसे के बिकने को हम खुलेआम रक्खे थे, दर्द बहुत थे छिपे मेरी पलकों के पीछे पर नज़र में किसी के नहीं थे, एक ज़रा सी आहट क्या हुई यारों निकल आये सारेआम आँसू जो तमाम रक्खे थे॥ राही (अंजाना) »

बैठी है

बैठी है

देखकर जिसको जुड़ जाते हैं हाँथ अक्सर, आज वही फैला कर दोनों हाँथ बैठी है, झुकाकर निकलते हैं हम जिसके आगे सर अपना, आज वही सरेबाजार सर झुकाकर बैठी है, टूटने नहीं देती है जो कभी नींद हमारी, आज भूल कर सभी ख्वाब वो नींद उड़ा कर बैठी है, बचाकर हर नज़र से जो हमे छिपाती रही उम्र भर, आज सफ़र ऐ सहर से वही नज़र मिलाकर बैठी है॥ राही (अंजाना) »

जवाब माँगता है

जो करता रहा इंतज़ार पल पल, आज हर पल का वो हिसाब माँगता है, दिल के रिश्तों की कीमत और प्यार का खिताब माँगता हैं, कितना बदल गया है वो, हर बात पर अब ईनाम माँगता है, तरसता था मिलने को हर दिन कभी, आज वही हर दिन वो इतवार माँगता है, बिन कुछ कहे चलता रहा साथ जो, वो आज दो कदम पर विश्राम माँगता है, पूछा ना सवाल कोई जिसने एक क्षण भी कभी, वो आज छोटी छोटी बात पर जवाब माँगता है॥ #राही# »

मेरी आँखों में

जाने कब से हैं मेरी आँखों में, ये ख्वाब किसके हैं मेरी आँखों में। मैं तो सूखा हुआ सा दरिया था, ये मौज किसकी है मेरी बाहों में।। मैं तो सोया था तन्हा रातों में, ये पाँव किसके हैं मेरे हाथों में। यूँ तो रहता था सूने आँगन में, ये बोल किसके हैं मेरे आँगन में।। सूखा बादल था मैं तो राहों का, ये बून्द किसकी है मेरी राहों में, चुप ही रहते थे शब्द नज़्मों में, ये होंठ किसके हैं मेरी ग़ज़लों में॥ राही (अंजाना) »

बखूबी

बहुत ही बखूबी से तुमने मुझे नज़रन्दाज़ किया, जानते हुए भी मुझको क्यूँ अनजान किया, जब खामोश मोहब्बत ही हमारी जुबान थी, तो क्यों रिश्तों को अपने यूँ अज़ान किया॥ To be cont.. राही (अंजाना) »

माँ

ममता के आइने मे प्यारी सी सूरत है माँ, सूरज की धूप मे छाया का आँचल है माँ, दुखों के समन्दर में सुख का किनारा है माँ, दुनियॉ की भीड़ में सकून का ठिकना है माँ, अँधेरी कोठरी में रौशनी का उजाला है माँ, प्रेम और स्नेह में प्रकर्ति की गोद है माँ। बेमोल अलंकारों में अनमोल नगीना है माँ, निराकार भगवान की साकार प्रतिमा है माँ॥ राही# »

छुपा लूँ क्या

तेरी आँखों के बिस्तर पर अपने प्यार की चादर बिछा दूँ क्या? तेरे ख़्वाबों के तकिये के सिरहाने मैं सर टिका लूँ क्या? कर दूँ मैं मेरे दिल के जज़्बात तेरे नाम सारे, दे इजाज़त के तेरी आँखों से मेरी आँखें मिला लूँ क्या? अच्छा लगता है मुझे तेरी पलकों का आँचल, तू कहे तो खुद को इस आँचल में छुपा लूँ क्या? राही (अंजाना) »

कुछ कह नहीं सकता

मिल जायेगी ताबीर मेरे ख्वाबों की एक दिन, या ख्वाब बिखर जायें कुछ कह नहीं सकता। बह जाउं समंदर में तिनके की तरहं या फ़िर, मिल जाये मुझे साहिल कुछ कह नहीं सकता। इस पार तो रौशन है ये मेरी राह कहकशा सी, मेरे उस पार अंधेरा हो कुछ कह नहीं सकता। गुमनाम है ठिकाना और गुमनाम मेरी मंजिल, किस दर पे ठहर जाउं, कुछ कह नहीं सकता। एक बेनाम मुसाफिर हूँ और बेनाम सफर मेरा, किस राह निकल जाउं, कुछ कह नहीं सकता। कर दी है ... »

राही बेनाम

न ये ज़ुबाँ किसी की गुलाम है न मेरी कलम को कोई गुमान है, छुपी रही बहुत अरसे तक पहचान मेरी, आज हवाओं पर नज़र आते मेरे निशान है, जहाँ खो गईं हैं मेरे ख़्वाबों की कश्तियाँ सारी, वहीं अंधेरों में जगमगाता आज भी एक जुगनू इमाम है, कुछ न करके भी जहाँ लोगों के नाम हैं इसी ज़माने में, वहीं बनाकर भी राह कई ये राही बेनाम है॥ राही (अंजाना) »

पापा

माँ के लिया बहुत सुना पढ़ा लिखा है सभी ने। कुछ पंक्तियाँ पापा के नाम। छुटपन से हर रोज पापा मेरे मुझे टहलाने ले जाते रहे, ऊँगली पकड़ कर मेरी मुझे वो रास्ता दिखाते रहे, मैं करके शैतानी उनको बहुत सताता रहा, वो भुलाकर शरारत मेरी मुझे गोद में उठाते रहे, मैं करके सौ इशारे उनकी राह भटकाता रहा, वो हर बढ़ते कदम पर मुझे सही बात बताते रहे, इस सोंच में के मैं उनका सहारा बनूगा, वो मुझको हर दिन नया पाठ पढ़ाते रहे॥ ... »

बिखरा हूँ

टूट कर ही जुड़ा हूँ यूँही नहीं बना हूँ मैं, गिरा हूँ सौ बार फिर सौ बार उठा हूँ, यूँही नहीं सीधा खड़ा हूँ मैं, बिखरा हूँ कभी सूखे पत्तों की तरह, तो काटों सा किसी को चुभा हूँ मैं, लहर नदिया संग बहा हूँ फिर भी प्यासा रहा हूँ मैं, डर कर सहमा सा छुपा था कहीं, आज की भीड़ में भी डटा हूँ मैं॥ राही (अंजाना) »

शहीद हुए मतवाले

। भगत सिंह और राजगुरु के संघर्षों बलिदानों की, ये धरती है वीर बहादुर चौड़ी छाती वालों की, ब्रिटिश राज को धूमिल कर मिट्टी में मिलाने वालों की, माँ के आँचल को छोड़ तिरंगे की शान में मिटने वालों की, ये कविता नहीं कहानी है उन माँ के प्यारे लालों की, खोकर अपनी हस्ती को भी अमर हुए जवानों की, झुककर नमन करने फिर आँखों में अश्रु आने की, लो फिर से आई है बेला याद करें हम, देश की खातिर लड़ते लड़ते जो शहीद हुए उन ... »

चील कौवो सा नोचता ये संसार

चील और कौवो सा नोचता रहता संसार है, ये कैसा चोरों का फैला व्यापार है, दहेज के नाम पर बिक रही हैं नारियाँ कैसे, ये कैसा नारियों को गिरा कर झुका देने वाला हथियार है, न चाह कर भी बिक जाती है जहाँ अपनी ही हस्ती, ये मोल भाव का जबरन फैला कैसा बाज़ार है॥ राही (अंजाना) »

माँ के लाल

भगत सिंह, शिव राज गुरु, सुखदेव सभी बलिदान हुए, इस धरती माँ की खातिर कितने ही अमर नाम हुए, ब्रिटिश राज की साख मिटाने को एक जुट मिटटी के लाल हुए, कभी सीने पर गोली खाकर कभी फांसी पर लटक काल के गाल हुए, इंकलाब के नारों से भगवा रंग मिलकर लाल हुए, तिरंगे को लहराने की चाहत में शहीद माँ के लाल हुए॥ राही (अंजाना) »

रंग गुलाल

रंग गुलाल के बादल छाये रंगो में सब लोग नहाये देवर भाभी जीजा साली करें ठिठोली खेलें होली बोले होली है भई होली खायें गुजिया और मिठाई घुटे भांग और पिये ठंडाई गले मिलें जैसे सब भाई भांति भांति के रंग लुभावन प्रेम का रंग सबसे मन भावन प्रेम के रंग में सब रंग जाएँ जीवन को खुशहाल बनाएँ उ खेलें सभी प्रेम से होली बोलें सभी स्नेह की बोली मिलें गले बन के हमजोली ऐसी है अनुपम ये होली »

होली की टोली

होली पे मस्तों की देखो टोली चली, रँगने को एक दूजे की चोली चली, भुलाकर गमों के भँवर को भी देखो, आज गले से लगाने को दुनीयाँ चली, हरे लाल पिले गुलाबी और नीले, अबीर रंग खुशयों के उड़ाने चली, भरकर पिचकारी गुब्बारे पानी के, तन मन को सबके भिगाने ज़माने के, हर गली घर से देखो ये दुनियां चली॥ राही (अंजाना) »

जो भी दिल में है छिपा बयां कीजे

जो भी दिल में है छुपा मुझको तो दिखा दीजे, जो ज़ुबा तक न आ सके तो आँखों से जता दीजे, प्यार है हमसे तो खुल कर के ही बयां कीजे, न हो कोई बात तो इशारे में ही ये खता कीजे, यूँ तो ख़्वाबों में बनाई हैं बातें कितनी, न हो मंज़ूर तो गुज़ारिश है के भुला दीजे, रखके सीने से लगाई हैं यादे तेरी, अब सरेआम न इनको यूँ हवा दीजे, जो भी दिल में है छुपा मुझको तो दिखा दीजे॥ राही (अंजाना) »

बारिश का इंतज़ार

लगाकर टकटकी मैं किसी के इंतज़ार बैठा हूँ, भिगा देगी जो मुझ किसान की धरती मैं उसी के एहतराम में बैठा हूँ, बेसर्ब बंज़र सी पड़ी है मेरे खेतों की मिट्टी, मैं आँखों में हरियाले ख़्वाबों के मन्ज़र तमाम लिए बैठा हूँ॥ राही (अंजाना) »

ख़्वाबों की बंज़र ज़मी

देख लूँ एक बार इन आँखों से बारिश को, तो फिर इन आँखों से कोई काम नहीं लेना है, बंजर पडे मेरे ख़्वाबों की बस्ती भीग जाए एक बार, तो फिर इस बस्ती के सूखे हुए ख़्वाबों को कोई नाम नहीं देना है, चटकता सा खटकता है ये दामन माँ मेरी धरती, सम्भल कर के बहल जाए फसल जो रूप खिल जाए, तो फिर धरती के आँगन से कोई ईनाम नही लेना है॥ राही (अंजाना) »

बचपन गरीब

यूँ तो हर रोज गुजर जाते हैं कितने ही लोग करीब से, पर नज़र ही नहीँ मिलाते कोई इस बचपन गरीब से, रखते हैं ढककर वो जो पुतले भी अपनी दुकानों में, वो देखकर भी नहीं उढ़ाते एक कतरन भी किसी गरीब पे, बचाते तो अक्सर दिख जाते हैं दो पैसे फकीर से, पर लगाते नहीं मुँह को दो रोटी भी किसी बच्चे गरीब के॥ राही (अंजाना) »

गरीबी में जलते बदन

दे कर मिट्टी के खिलौने मेरे हाथ में मुझे बहकाओ न तुम, मैं शतरंज का खिलाड़ी हूँ सुनो, मुझे सांप सीढ़ी में उलझाओ न तुम, जानता हूँ बड़ा मुश्किल है यहाँ तेरे शहर में अपने पैर जमाना, मगर मैं भी ज़िद्दी “राही” हूँ मुझे न भटकाओ तुम, बेशक होंगे मजबूरियों पर टिके संबंधों के घर तुम्हारे, मगर मजबूत है रिश्तों पर पकड़ मेरी इसे छुड़ाओ न तुम, माना पत्थर दिल हैं लोग बड़े इस ज़माने में तोड़ना मुश्किल है, मगर म... »

आयत की तरह

किसी आयत की तरह रात दिन गुनगुनाता रहा हूँ तुझे, सबकी नज़रो से बचाकर अपनी पलकों में छिपाता रहा हूँ तुझे, मेरे हर सवाल का जबाब तू ही है मगर, फिर भी एक उलझे सवाल सा सुलझाता रहा हूँ तुझे, यूँ तो बसी है तू मेरी दिल की बस्ती में, मगर फिर भी दर बदर तलाशता रहा हूँ तुझे॥ राही (अंजाना) »

बाहर निकल आया

गुजरता रहा उसकी आँखों से हर रात किसी भरम सा मैं, फिर एक रोज़ खुद ब खुद उसके ख्वाबों से बाहर निकल आया मैं, छुप कर बैठा रहा मैं एक झूठ की आड़ में बरसों, फिर एक रोज किसी सच्ची ज़ुबान सा बाहर निकल आया मैं, ईमारत ए नीव सा दबा बैठा रहा वजूद मेरा, फिर एक रोज़ किसी मस्ज़िद की अज़ान सा बाहर निकल आया मैं॥ राही (अंजाना) »

छोड़ कर जा

बेशक छोड़ दे मगर खुद से मुझे कुछ इस तरह जोड़ कर जा, के भले आसमाँ न रहे मेरे हाथों की पहुंच में मगर अपने आँचल की ज़मी मेरे पैरों में छोड़ कर जा, सूखा है सदियों से मेरी आँखों में एक दरिया बेसबर, डूब न सही मेरी आँखों में मगर बेखबर थोड़ी सी नमी छोड़ कर जा, यूँ तो खामोश ही हूँ मगर पुतला ही न बन जाऊं कहीं मैं, सो गुजारिश है तुझसे मुझे तोड़ कर जाने वाले, के मिट जाए हस्ती भी मेरी तो क्या तू रस्म ए रूह को मेरी खु... »

चुस्की चाय की

वही चाय के दो कप और एक प्लेट लौटा दे, कोई तो तेरे साथ बीते पलों को वापस लौटा दे, एक चाय के कप का बना कर झूठा बहाना, वो तेरा रोज रोज मेरे घर चले आना लौटा दे, तेरे साथ बैठ कर वो नज़रें मिलाना, वो चाय की चुस्की वो वक्त पुराना लौटा दे॥ राही (अंजाना) »

चाय की प्याली

तेरे साथ बिताई मस्ती और चाय की वो चुस्की याद आई है, लो आज फिर से बीते लम्हों की एक बात याद आई है, तेरे साथ बैठ कर जो बनाई थी बातें, उन बातों से फिर से दो कपों के टकराने की आवाज आई है, छोड़ दी थी चाय की प्याली कभी की हमने, मगर आज फिर से तेरे साथ चाय पीने की इच्छा बाहर आई है॥ राही (अंजाना) »

तस्वीर तेरी

अपनी पलकों के बिस्तर पर मैं तुझको हर रोज सुलाता हूँ, तू जग न जाए कहीं इस डर से पलकों को ज़रा धीरे झपकाता हूँ, तेरे संग ही मैं अपने सभी ख़्वाबों को सजाता हूँ, तू भूल न जाए मुझे इस डर से मैं हकीकत से नज़रें चुराता हूँ, यूँ तो मेरे दिल में ही घर है तेरी हस्ती का मगर, फिर भी आए दिन कागज़ पर तेरी नई तस्वीर बनाता हूँ।। राही (अंजाना) »

मिट्टी से जुड़े सैनिक

आंधी और तूफानों में भी डटे रहते हैं, हम वो हैं जो हर मौसम में खड़े रहते हैं, उखड़ते हैं तो उखड़ जायें पेड़ और पौधे जड़ों से, हम तो वो हैं जो देश की ज़मी से जुड़े रहते हैं, आजाद दिख जाते हैं उड़ते परिंदे कभी, तो कभी बिगड़े हालात नज़र आते हैं, पर हम तो वो हैं जो हर हाल में तिरंगे की शान बने रहते हैं, धुंधली नज़र आती है जहाँ से सरहद के उस पार की धरती, उसी हिन्दुस्तान की मिटटी से हम हर पल जुड़े रहते हैं॥ राही (अं... »

फौलादी फौजी

हाथ में हथियार और दिल को फौलाद किये बैठे हैं, सरहद के हर चप्पे पर हम बाज की नज़र लिये बैठे हैं, जहाँ सो जाता है चाँद भी चैन से हर रात में, वहीं खुली आँखों में अमन का हम सपना लिए बैठे हैं, ठण्ड से सिकुड़कर सिमट जाते हैं हौंसले जहाँ, वहीं बर्फीली चादर में भी उबलता जिगर लिए बैठे हैं, डर कर अँधेरी गलियों से भी नहीं गुजरते जहाँ कुछ लोग, वहीं हम सैनिक हर लम्हा दुश्मनों के बीच फंसे बैठे हैं॥ राही (अंजाना) »

सैनिक कहलाते हैं हम

माँ की गोद छोड़, माँ के लिये ही वो लड़ते हैं, हर पल हर लम्हां वो चिरागों से कहीं जलते हैं, भेजकर पैगाम वो हवाओं के ज़रिये सपनों में अपनी माँ से मिलते हैं, हो हाल गम्भीर जब कभी कहीं वो, चुप रहकर ही खामोशी से सरहद के हर पल को बयाँ करते हैं, लड़कर तिरंगे की शान की खातिर, वो तिरंगे में ही लिपट कर अपना जिस्म छोड़ते हैं, जो करते हैं बलिदान सरहद पर, वो सैनिक सैनिक सैनिक कहलाते हैं हम॥ राही (अंजाना) »

हसींन चेहरे

बर्बाद कर बैठ जाते हैं अक्सर वो चेहरे हसीन होते हैं, पर अंधेरों की सरपरस्ती में ही वो खुद का वजूद लिए होते हैं, अब क्या बद्दुआयें दें हम उन आइना ऐ हुस्नों को, जो अपनी ही रूह का अक्सर अक्स लिए होते हैं॥ राही (अंजाना) »

बेटी की चाहत

अँधेरे कमरे से बाहर अब मैं निकलना चाहती हूँ, माँ की नज़रों में रहकर अब मैं बढ़ना चाहती हूँ, धुंधली न रह जाए ये जिन्दगी मेरी, यही वजह है के मैं अब पढ़ना चाहती हूँ, खड़ी हैं भेदभावों की दीवारें यहाँ अपनों के ही मध्य, मैं मिटा कर मतभेद सबसे जुड़ना चाहती हूँ, दबा रहे हैं जो आज मेरी देह की आवाज को, अब धड़कन ऐ रूह भी मैं उनको सुनाना चाहती हूँ॥ राही (अंजाना) »

समय लगेगा

सोये होते तो उठ जाते बेहोश हैं लोग अभी उठाने में ज़रा समय लगेगा, गहरे हैं रिश्ते मगर फिर भी दूरियां हैं, बीच में हैं खड़ी दीवारों को गिराने में ज़रा समय लगेगा।। आँखों में दरिया है और पैरों में समन्दर बिछा है, डूबकर उस पार निकल जाने में ज़रा समय लगेगा॥ खेल है अजीब और खिलाड़ी गजब हैं इस शतरंजी ज़माने में, अभी मुक्कमल चाल लगा कर हराने में ज़रा समय लगेगा॥ राही (अंजाना) »

सम्भाल कर

रक्खे तो हैं कुछ टुकड़े सम्भाल कर, प्यारे से दिल के चन्द हिस्से सम्भाल कर, बनाते थे लोग पल पल बात कई, आज बस छिपा के रक्खे हैं कुछ किस्से सम्भाल कर, बहुत सारे तोहफा ऐ यादें बनी थी मगर, अब किताबों में दबा रक्खे हैं सूखे गुलाब सम्भाल कर॥ राही (अंजाना) »

बेटी हूँ हां बेटी हूँ

बचपन से ही सहती हूँ, मैं सहमी सहमी रहती हूँ, छुटपन में कन्या बन कर संग माँ के मैं रहती हूँ, पढ़ लिखकर मैं कन्धा बन परिवार सम्भाले रखती हूँ, फिर छोड़ घोंसला अगले पल मैं पति घर में जा बसती हूँ, पत्नी रूप में भी मैं हर बन्धन में बन्ध कर रहती हूँ, खुद के ही पेट से फिर माँ बनकर मैं (बेटी) जन्म अनोखा लेती हूँ, पढ़ जाऊ तो नाम सफल और जीवन सरल कर देती हूँ॥ बचपन से ही सहती हूँ, मैं सहमी सहमी रहती हूँ, मैं बेटी... »

बेटी की आवाज

माँ की कोख में ही दबा देते हो, मुझको रोने से पहले चुपा देते हो, आँख खुलने से पहले सुला देता हो, मुझको दुनियां की नज़र से छुपा देते हो, रख भी देती हूँ गर मैं कदम धरती पर, मुझको दिल में न तुम जगह देता हो, आगे बढ़ने की जब भी मै देखूं डगर, मेरे पैरों में बेडी लगा देते हो, पढ़ लिख कर खड़ी हो न जाऊं कहीं, मुझको पढ़ाने से जी तुम चुरा लेते हो, क्यों दोनों हाथों में मुझको उठाते नहीं, आँखों से अपनी मुझको बहा देत... »

मुझको बचाओ मुझको पढ़ाओ

कन्या बचाओ खुद कन्या कहती है- मुझको बचाओ तुम मुझको बचाओ, सपना नहीं अब हकीकत बनाओ, बेटा और बेटी का फर्क मिटाओ, बेटी बचाओ अब बेटी पढ़ाओ, बेटे के प्रति प्यार और बेटी को समझें भार, ऐसे लोगों की गलत सोंच भगाओ, मुझको बचाओ तुम मुझको बचाओ, रखने से पहले कदम ना मेरे निशाँ मिटाओ, आने दो मुझको तुम सीने से लगाओ, फैंको ना मुझको कचरे के देर में, मारो ना मुझको तुम ममता की कोख में, घर के अपने तुम लक्ष्मी बनाओ, मुझक... »

अभी बाकी है।

अभी बाकी है।

तेरी काया नहीं तो तेरा साया ही सही कुछ तो है जो मेरे साथ बाकी है, कभी मेरे ख़्वाबों में तेरे अक्स का मुझे छू कर चले जाना, तो कभी तेरे संग बीते लम्हों का गुजर जाना, आज भी मेरी जुबां से अक्सर तेरा नाम निकल जाना बाकी है, तुझे याद नहीं है बेशक मेरी पहचान भी तो क्या, मेरी आँखों से निकलते अश्कों से तेरी तस्वीर का बन जाना अभी बाकी है॥ राही (अंजाना) »

तिरंगे के रंग

तिरंगे के रंग

अपनी हथेली पर शहीदों के नाम की मेंहदी रचाता रहा हूँ मैं, तिरंगे के रंग में शहादत का रंग मिलाता रहा हूँ मैं, हार कर सिमट जाते हैं जहाँ हौंसले सभी के, वहीं हर मौसम में सरहद पर लहराता रहा हूँ मैं, सो जाती है जहाँ रात भी किसी सैनिक को सुलाने में, अक्सर उस सैनिक को हर पल जगाता रहा हूँ मैं, दूर रहकर जो अपनों से चन्द स्वप्नों में मिलते हैं, उन्हें दिन रात माँ के आँचल का एहसास कराता रहा हूँ मैं॥ राही (अंज... »

सपना

सपना

काश सपना मेरा ये हकीकत हो जाए, मैं बाहर और तू यूँही अंदर हो जाए, रख कर बर्तन में तुमने मुझे बहुत सताया है, अब तुमको भी सताने की कुछ खुरापात हो जाए, खेले हो खेल तुम मुझे फंसाकर साहिब, अब तुमको फांस कर भी एक खेला हो जाय, काश ये सपना मेरा हकीकत हो जाए तो कैसा हो जाए॥ राही (अंजाना) »

बन्द मुट्ठी

बन्द मुट्ठी

बन्द मुट्ठी में कई राज़ दबाये बैठा हूँ, अनगिनत शहीदों के कई नाम छुपाये बैठा हूँ, मेरी खातिर होती रही हैं कितनी ही कुर्बानी, मैं बेज़ुबान सही पर हर जवान की पहचान सजाये बैठा हूँ, रंग भी गजब हैं और रूह भी अजब हैं ज़माने मे साहिब, मगर मैं (तिरंगा)तीन रंगों में ही सारा हिन्दुस्तान समाये बैठा हूँ॥ राही (अंजाना) »

इंकलाब ए कहानी

इंकलाब ए कहानी

मैं हक़ीक़त में आजादी का एहसास करने ही लगा था के बस। फिर से मुझे ज़ंजीरों में जकड़ा जाने लगा।। आ ही गया था के वो लम्हा ए इमकान (सम्भावना) खुशनसीब, के बस यह एक ख़वाब है मेरा मुझे ये दिन रात जताया जाने लगा, उठाकर हाथ में तिरंगा जब भी मैं अपने हाथ उठाने लगा, सरहद पर मर मिटने वालों की सबको मैं याद दिलाने लगा, धरती माँ के आँचल में है कितना सुकून ये हर हिन्दुस्तानी को मैं फिर बताने लगा, आजादी की खातिर जो मिट... »

तिरंगा ए शान

तिरंगा ए शान

रंग हैं विभिन्न देखो फिर भी एक नाम है, एक ही है माटी अपनी एक ही तो शान है, बीच में चक्र जो वो जीत का अभिमान है, मुठ्ठी में है बन्द जो तिरंगा अपनी जान है, रंग हैं विभिन्न देखो फिर भी एक नाम है, सरहद पर मिटने वालों की दस्तक का ये निशान है, भरे फक्र से जो छाती माँ की गर्व् और अभिमान है, ऐसी हस्ती रखता ये तिरंगा मेरा महान है, रंग हैं विभिन्न देखो फिर भी एक नाम है, दिल में और दिमाग में जो बसे वो हिन्दु... »

धुँए में जीवन

धुँए में जीवन

तू जला कर मुझे धुंए के छल्ले बना कर खुश है, तो मैं भी खुश हूँ हर रोज तुझे झुलसता देख कर, तू सुलगाकर मुझे दे रहा है हर लम्हा हवा, तो मैं भी निगल रही हूँ तुझे तेरी ज़िन्दगी घुला कर।। राही (अंजाना) »

सामने तो आ

शब्दों में नहीं तो खामोशी ही सही, किसी ज़ुबां में तो तू निकल कर सामने आ, कब तलक छुपता रहेगा तू राज़ अब दिल में, खुल कर अब किसी सच सा तू निकल कर सामने आ, खेल हैं कई और खिलौने भी बहुत हैं ज़माने में, छोड़ कर बचपना तू अब हकीकत में निकल कर सामने आ॥ राही (अंजाना) »

तलाश

न दिल तलाश कर न धड़कन तलाश कर, जो रूह में घर कर जाए वो दरिया तलाश कर, झुकता नहीं है आज कोई सर किसी के आगे, जहाँ हर आदमी झुक जाए वो चौखट तलाश कर, शर्म के तकिये पर अब कोई सिमटता कहाँ हैं, जो हर सिलबट मिटा दे वो बिस्तर तलाश कर॥ राही (अंजाना) »

खबर ए लापता

सबके ज़हन में आने की ये तरकीब निकाली हमने, के खुद ही के लापता होने की खबर फैला डाली हमने, बिक गया जब हर ज़रा ज़मी पर कुछ खाली न बचा, छोड़ कर ज़मी चाँद पर ही अपनी खोली बना डाली हमने॥ राही (अंजाना) »

आवाज़ तेरी

जब सुनाई नहीं देती यहाँ किसी को चीख भी किसी की, तो कौन सुनकर आऐगा आगे यहाँ अब खामोशी की आवाज तेरी, जिस तरह मुश्किल है बहती हवा को छू पाना, उसी तरह मुम्किन नहीं सुन पाना साँसों की आवाज तेरी, जो देख कर भी कर रहे हैं अनदेखा तुझे, उन्हें कहाँ सुनाई देगी ख़्वाबों की आवाज तेरी, भुला कर सो गए हैं चैन की नींद जो तेरा वजूद, तो क्या बना पाएंगे वो तेरी तस्वीर भूल कर यादों की आवाज तेरी॥ राही (अंजाना) »

सिर्फ देख लू एक बार

सिर्फ देख लूँ एक बार उसे करीब से, फिर इन हाथों में मैंने कोई जाम नहीं लेना है॥   छलक जाए गर मेरी आँखों से अश्क तो समझ लेना, उसी ने कहा था के मेरा नाम नहीं लेना है॥   राही (अंजाना) »

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