शिव की शक्ति बनकर तूने हर एक क्षण साथ निभाया नारी,
पिता- पती के घर को तूने हर एक क्षण महकाया नारी,
हर एक युग में अपने अस्तित्व का तूने एहसास कराया नारी,
प्रश्न उठे भरपूर मगर हर जन को तूने निरुत्तर कर दिखाया नारी,
ममता के आँचल में मानुष को तूने प्रेम सिखाया नारी,
आँख उठी जो तुझपर तूने काली रूप दिखाया नारी,
बेटा-बेटी के बीच पनपते फर्क को तूने मिटाया नारी,
कन्धे से कन्धा मिलाकर तूने जग में सम्मान फिर पाया नारी।।
राही (अंजाना)
नारी
Comments
3 responses to “नारी”
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शाबाश
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Good
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बहुत ही सुंदर पंक्तियां लिखी आपने नारी के ऊपर
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