मेरी आदत

मुझे अब भी हवाओं में तुम्हे सुनने की आदत है ,
मुझे अब भी निशाओं में तुम्हे चुनने की आदत है ..
मैं अब भी फ़िज़ाओं में तुम्हे महसूस करता हूँ ,
मुझे अब भी घटाओं में तुम्हे बुनने की आदत है …..

…atr

Comments

2 responses to “मेरी आदत”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Nice

  2. Satish Pandey

    Waah waah

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