जहमत

मुझे कुछ भी कहने की ज़हमत नहीं होती,
वो खुद ब खुद मेरी आँखों से छलक जाती है।।
राही (अंजाना)

Comments

2 responses to “जहमत”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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