एक जंजीर ढूंढता हूँ ..

मुझे हमेशा तुम से बाँधें रखेँ ….

इस क़ायनात में , ऐसी एक जंजीर ढूंढता हूँ …..

 

दौलत से सब बन जाते है अमीर …

लेकिन तुझमे मैं , वो दिल वाला अमीर ढूंढता हूँ …..

 

बांवरा , मगर थोड़ा सयाना बन ….

पार हो जाये तेरे दिल के….

मैं तरकश में ,  वो मोहब्त का तीर ढूंढता हूँ ….

 

पंकजोम ” प्रेम “

Comments

11 responses to “एक जंजीर ढूंढता हूँ ..”

  1. Panna Avatar
    Panna

    Lafzo se baandh diya aapne to….padne Wala bina taareef kite nahi raha sakta

    1. Pankaj Soni Avatar
      Pankaj Soni

      कुछ अलग रंग जमता है , हमारी महफ़िल में ….
      कभी फुर्सत मिले तो जरूर शरीक होइएगा …..पन्ना भाई …..

      1. Anirudh sethi Avatar
        Anirudh sethi

        इक बार शरीक हुए थे हम किसी महफ़िल में
        उनको देखा पहली दफ़ा,
        चढा रंग ऐसा कि
        अब तक उतरा नहीं
        अब कोई रंग चढने की गुंजाईश नहीं….

      2. Pankaj Soni Avatar
        Pankaj Soni

        SubhanallaH

      3. Anirudh sethi Avatar
        Anirudh sethi

        धन्यवाद

      4. Panna Avatar
        Panna

        पहले से ही शरीक है हम हर उस महफिल में
        जिसमें आप हो और आपके अल्फ़ाज हों

      5. Pankaj Soni Avatar
        Pankaj Soni

        अति उत्तम विचार ….

  2. Anirudh sethi Avatar
    Anirudh sethi

    अनुपम

    1. Pankaj Soni Avatar
      Pankaj Soni

      Sukkriyaaa bhai

  3. Satish Pandey

    दौलत से सब बन जाते है अमीर …

    लेकिन तुझमे मैं , वो दिल वाला अमीर ढूंढता हूँ
    वाह वाह

  4. अति उत्तम

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