पंकजोम " प्रेम ", Author at Saavan's Posts

ज़मीन तुम हो

मेरी हर इक ग़ज़ल की अब तक ज़मीन तुम हो ….. मेरा अलिफ़ बे पे से चे और शीन तुम हो …. जज़्बात से बना मैं इक प्यार का नगर हूँ रहते हो इस में तुम ही इस के मकीन तुम हो ….. इन क्रीम पाउडर का एहसान क्यूँ हो लेते मैं जानता हूँ तुमको कितने हसीन तुम हो …. तुमको कोई तो समझे संसार कोई साँसे लेकिन किसी की ख़ातिर कोई मशीन तुम हो …. टूटोगे तुम कभी तो बिखरूंगा मैं ज़मीं पर कुछ और हो न हो पर... »

किताब हो जाओ

नेट के इस ज़माने में ऐ ” प्रेम ” ख़ुद ही तुम इक किताब हो जाओ …. पंकजोम ” प्रेम “ »

पानी पानी की

एक ताज़ा ग़ज़ल …….. गुलफिशानी – फूलों की बारिश , बदगुमानी – शक ******************************** मैंने दुश्मन पे गुलफिशानी की … आबरू.. उसकी पानी पानी की …. मुझ पे जब ग़म ने मेहरबानी की ….. मैने फिर ग़म की मेज़बानी की …. मैं जिन आँखों का ख़्वाब था पहला क्यों ….. उन्होंने ही बदगुमानी की…. वार मैंने निहत्थों पे न किया यूँ अदा रस्म ख़ानदानी की …... »

” कोई निशानी भेज दो “

मन बहलाने को कोई निशानी भेज दो नींद नहीं आती कोई कहानी भेज दो ….. संजीदा रहूँ हमेशा तेरी यादों में  मेहरबान बन कोई मेहरबानी भेज दो…. भा गया कुछ यूँ दिल को तेरा अपनापन दीदार करने तस्वीर कोई पुरानी भेज दो .. तड़प रहा हूँ कब से मिलने को   उम्मीद तुम कोई पहचानी भेज दो … जो दिलोँ – जान से हो सिर्फ मेरी ख़ुदा ऐसी कोई दानी भेज दो.. महसूस होती हैं अक्सर दिल को तेरी सिसकिया ख़त में मेर... »

” ये तिरंगा “

हर हिंदुस्तानी की इक ख़ास पहचान , ये तिरंगा …. भारत माँ की करता बेनज़ीर शान , ये तिरंगा …. सीमा पर तैनात हर जवान में डाल दे जान , ये तिरंगा …..   ” पंकजोम प्रेम “ »

” बड़ी फ़ुरसत में मिला मुझ से ख़ुदा है…”

    मेरी सांसो में तू महकता हैँ क़ायनात – ए – ग़ैरों में तू ही अपना लगता हैँ 1 . होंठों की ख़ामोशी समझा ना सके नैनों में इश्क़ मेरा झलकता हैँ ( 2 ) भर चुकी हैं सुराही – ए – मोहब्त इश्क़ मेरा अब बूंद – बूंद कर रिसता हैं…. ( 3 ) जितना जाना चाहूँ तुम से दूर कारवाँ यादों का उतना ही तेरी और सरकता है…( 4 ) नैनों से दूर हो तो क्या हुआ ये सुख़नवर तेरा हा... »

” मौत करती है रोज़ “

मौत करती है नए रोज़ बहाने कितने ए – अप्सरा ये देख यहाँ तेरे दीवाने कितने   मुलाक़ात का इक भी पल नसीब ना हुआ कोई मुझ से पूछे बदले आशियाने कितने   तेरे इंतजार में हुई सुबह से शाम ये देख बदले ज़माने कितने   उन्हें भूख थी मुझ से और उल्फ़त पाने की लेकिन दिल में मेरे चाहत के दाने कितने   नशीली उन निग़ाहों को देख नशा परोसना भूल गए मयख़ाने कितने   रंग जमा देती है मेरी सुखनवर... »

” नया साल आ रहा हैँ “

रह – रह कर ज़ेहन में बस यही ख्याल आ रहा हैं मुझे तनिक बदलने दो , नया साल आ रहा हैं …..   बेचैन धड़कन हो गयी है शायद संग अपने ख़ुशियां बे-मिसाल ला रहा हैं ….   जल उठी दिल में कंदीले – ए – इश्क़ ये बे-जुबां भी ग़ज़ले गा रहा हैँ..   सिर्फ साल बदला हैं , इंसान नहीं कुछ तो ख़ामोश रहकर समझा रहा हैं….   वो तो कब का कह चुके हक़ीक़त में  अलविदा फिर क्यों ख़्वाब... »

” इस नववर्ष “

उन्नति को लगी रहे आप से मिलने की लगन …. इस नववर्ष , आपके यहाँ हो खुशियों का आगमन …. सिलसिलेवार रहे चेहरे पर  रौनक – ए – मुस्कराहट ….. रब की रहमत से  सदा महकता रहे आपका घर आँगन….   पंकजोम ” प्रेम “ »

” इक जिद्द अधूरी रह गयी “

थे क़रीब इक दूजे के …. लेकिन फिर भी दरम्यां हमारे , दुरी रह गयी …. इबादत करते हुए , इक भी दर ना छोड़ा ख़ुदा का … फिर भी कोई मज़बूरी रह गयी.. कह देते थे , महफ़िल – ए – यारों में …. ” वो हैं मेरी ” …   . बस यही इक जिद्द अधूरी रह गयी …..   पंकजोम ” प्रेम “ »

” धुंधला नजारा “

मोहब्त का ले सहारा उन्हें पाने की सोची….. ख़ुद ही बे – सहारा हो गए …..   जिनका अक्श कभी ओझल ना हुआ , नजरों से …. वही आज इक धुंधला नजारा हो गए ….   जिन सागरों के किनारों पर रुक जाती थी …. हमारी कश्ती – ए – चाहत ….   आज वहीँ सागर बे – किनारा हो गए …..   पंकजोम ” प्रेम “ »

” कसक मुसलसल है “

चलो आज बात करे गुज़रे जमाने की मैंने जरूरत समझी आप सबको बताने की …..   संग उसके मुस्कुराकर समझते थे क्या बेनज़ीर रौनक है मेरे काशाने की ….   इक मरतबा भुला ही दिया ख़ुदा को बड़ी ख़ुशनसीब जिंदगी थी इस दीवाने की …   बेसूद हुआ एक एक अल्फ़ाज़ मेरा जब कोई राह ना दिखी उसे मुझे चाहने की…..   वो इस क़दर रुसवा हुए मुझ से की इक बार भी ज़रूरत ना समझी लौट आने की …  ... »

” अपनी क़ीमत “

अज़ीब समझ हैं अपनी ….   हम अपनी क़ीमत जानने से कही ज़्यादा ….   अपनी क़िस्मत जानना चाहते हैं….   पंकजोम ” प्रेम “ »

” चाँद ” आया हैं

क़ायनात ने क्या ख़ूब साज सजाया हैं …. जिंदगी के बे- रंग रंगो ने क्या रंग दिखाया हैं…. ज़रा नज़रे उठा देख ए – फ़लक , मेरी और …. मिलने मुझ से ” चाँद ” आया हैं….   पंकजोम ” प्रेम “ »

” मेरे अल्फाज़ “

महफ़िल – ए – यारोँ में , थोड़ा अलग दिखा देते हैँ ….. मुझे , मेरे अल्फ़ाज …… फितरत बता देते हैं , मेरी …. मेरे अल्फ़ाज ….. मैं इंसान हूँ तो जायज़ हैं , नफ़रत मैं भी कर लूँ ….. लेकिन हर मरतबा मोहब्त जता देते हैं ……. मेरे अल्फ़ाज …..   पंकजोम ” प्रेम “ »

” तलबगार हो गए “

तलब ऐसी उठी दिल से….. की उन्हीं के तलबगार हो गए…. जमाने की जुबां पर …. किस्से हमारी मुलाकातों के बार – बार हो गए…. पता कर चुके थे , हैँ उनकी तरकश में इक तीर – ए – मोहब्त ….. और उसी तीर के हम शिकार हो गए….   तलब – चाह तलबगार -चाहने वाला »

” राह – ए – माबूद “

थोड़ा रंज में , थोड़ी ख़ुशी में , साल ये बीता …. ख़ुद की मोहब्त को हारा , लेकिन फिर भी जीता ……   मुसलसल हैं आज भी यादों का कारवाँ …. थोड़ा तन्हा , थोड़ा मुस्कुराकर हूँ लिखता …   मुसाफ़िर हूँ यारों  , मंज़िल का पता नहीं .. इक टक लगायें राह – ए – माबूद हूँ देखता …   जाने वाले चले गए अपना बना कर …. आख़िर कोई क्यों नहीं , जाने वालों को रोकता ….   कल म... »

” किया गुनाह क्या “

साँसे चल रही हैँ , बिन उसके.. आने वाला ,  जीने में मज़ा क्या… चाह लिया उसे , उसकी इजाज़त के बगैर ….. इसमें किया गुनाह क्या …. मोहब्त हैं उनसे , तभी मांगती हैं  निगाहें दीदार …. वो ही आकर बताएं … इसमें क़ुसूर – ए – निग़ाह क्या ..     पंकजोम ” प्रेम “ »

” रंग जमा दो “

थोड़ा मायूस हूँ , थोड़ा तन्हा हूँ .. कोई राह – ए – ख़ुशी बता दो…. ख़ुद की ख़ामोशी देख , ख़ामोश क़ायनात भी दिख रही हैँ ….. कोई मुस्कुराना सीखा दो …. बे – रंग हो गयी हैं , चेहरे की रौनक …. कोई ” वाह ” ” वाह ” करके थोड़ा और रंग जमा दो ….   पंकजोम ” प्रेम “ »

” लूटा जाता हूँ , ” मैं ” “

कफ़स दिल में कुछ जज़्बात .. आबो संग बीता जाता हूँ ,  ” मैँ “….. पुष्प हूँ , खिलनें के लिए बना हूँ ….   फ़िर भी ना जाने क्यों , मुरझा जाता हूँ , ” मैँ “….   ज़रा कर इक निग़ाह मेरी और , ए – मेहरबान …..     रंज में रहता हूँ , फिर भी अपनों पर ख़ुशियां लूटा जाता हूँ , ” मैं ”    पंकजोम ” प्रेम “ »

” जरा इक निग़ाह डाल “# 2 liner ” 3 “

ज़रा इक निग़ाह डाल देखों सावन पर ” पंकजोम ” प्रेम ” ” …. ख़ामोश अल्फ़ाज़ मेरे ,सबसे बतियाते बतियाते दिखेंगे …..   पंकजोम ” प्रेम “ »

” इक टका ” # 2 liner ( 2 )

उसने कहा बहुत अमीर हूँ  ” मैं ” , दिल से…. लेकिन चाहत का इक भी टका , वो मुझ पर खर्च ना कर सकी.. »

” दो घूंट में ” # 2 Liner

अपनी पूरी कमाई तूने मय पर लूटा दी…..   ए  – ग़ालिब…. जरा मुझे ये बता… उस दो घूंट में , जिंदगी जीने का स्वाद कितना है….   पंकजोम ” प्रेम “ »

” कुछ ऐसा लिखूँ “

कुछ ऐसा लिखूँ , की पढ़ने वाले को लगे … मेरा एक – एक  अल्फ़ाज , गहरा हैँ … खों जाये वो मेरे अल्फाज़ो की महफ़िल में .. लगे उसे , मानो आज वक़्त , ठहरा हैं.. यादगार हों जाये उसके लिए , मेरी हर इक सुखनवरी …. एहसास हो , जैसे….. रौनक के पहरे से रोशन उसका , चेहरा हैं ..   पंकजोम ” प्रेम “ »

” सुराही – ए – मोहब्त “

दिल बेचैन हुआ , तो उसके दीदार का दिया दिलासा हैं ….. जाने वाले कल चले गए , लेकिन आज भी उनके लौट आने की …. छोटी सी आशा हैं ….. अब कोई तो बने सुराही – ए – मोहब्त …. क्योंकि ये सुख़नवर बहुत , प्यासा हैं ….   पंकजोम ” प्रेम “ »

” वक़्त लगता हैँ यहाँ “

वक़्त लगता हैं यहाँ , इंसान को इंसान समझने में ……. वक़्त लगता हैं यहाँ , पत्थर को भगवान समझने में …… आधी उम्र बीत जाती हैँ सोचने सोचने में .. क्योंकि वक़्त लगता हैं यहाँ , जीने के अरमान समझने में …..   पंकजोम ” प्रेम “ »

समझों तो यहीँ मोहब्त हैं

ये अल्फाज़ , अल्फ़ाज़ ही नहीं , दिल की ज़ुबानी हैं ….. इन्होंने ज़न्नत को , जो जमीं पर लाने की ठानी हैं … साथ देने को कई मरतबा भीग जाती हैं पलकें ….. समझों तो यही मोहब्त हैँ , ना समझों तो पानी हैं…..   पंकजोम ” प्रेम “ »

” चाँद का मायूस चेहरा”

कल मैंने अपनी प्रेमिका के उतर दिल में , चाहत का ज़खीरा देखा ….. अपने जिल्ले – सुभानी के इंतजार में , उस चाँद का मायूस चेहरा देखा .. स्वागत में उसने आब संग बिछा दी पलकें , मैंने हर इक आब पर नाम , मेरा देखा …   पंकजोम ” प्रेम ”   »

” सम्भाल ले ऐ – ख़ुदा “

सम्भाल ले ऐ – ख़ुदा , एक लम्हे के लिए मुझे…. अब  मैं हार रहा हूँ ….. तू ही बता मेरे साहिब , मैं क्यों ये जिंदगी तन्हा गुजार रहा हूँ …   तूने साज़ किया चेहरे पर , मुस्कराहट का …. लेकिन मैं क्यों , मायूसी स्वीकार रहा हूँ …..   जिल्ले – सुभानी कहता हैँ ये जग मुझे , अल्फाज़ो का ….। फिर मैं क्यों ख़ुद को ख़ामोशी में उतार रहा हूँ ….    ... »

sbbdo ki mehfil thi sjji……..

Shhbdo ki mehfil thi SJJI… yaaro hum bi chl diye apni MOHHBAT k kisse ” sunaane ” …. Jo dard tha dil m bya krte gye hum bi bhigi aankhiyo se… Kyuki hum the kisi hasina k hasin Dewaane…. Khaa hum se nikklne wale unn sbbdo ne…. Jindagi k kuch raz , raaz hi rehne do… Kyuki wo ache hote h.. Agr ho gye ho puraane…. Hum bi ye sochte rhe… Wo sma... »

” मेरे माधव ही नहीं आप सब “

मेरे माधव ही नहीं आप सब … राह – ए – क़ामयाबी में , मेरी तरह एक मुसाफ़िर भी  हो …. भरने फ़लक – ए – क़ामयाबी पर ऊंची उड़ान …… मेरे संग उड़ने वाले तायर हो … जिल्ले – सुभानी – ए – अल्फ़ाज़ हो ….. और सुखनवरी की दुनिया के क्या बेहतरीन सुख़नवर हो …. ….   पंकजोम ” प्रेम “….   तायर – पंछी जिल्... »

रशमें – ए – इश्क़

जब महफ़िल – ए – इश्क़ में , निग़ाह से निग़ाह टकराई … दिल की बात चेहरे पर उभर आई ….   अँधेरे में डूबे मेरे एक एक लम्हे को रोशन करने …. उसने क्या ख़ूब कंदीले – ए – मुस्कराहट जलाई ….   ख़ामोश थी उसकी जुबां , ख़ामोश एक एक अल्फ़ाज़ …. मुझे अपने दिल की और ले जाने ,  स्वागत में उसने पलके बिछाई…   मैं तो वाकिफ़ था नशा – ए – उल्फ़त... »

” हाल – ए – दिल “

देखकर उसकी मुस्कान , ख़ुशी से भर जाता हूँ , मैं ….. उसकी एक झलक पाने …. कुछ भी कर जाता हूँ , मैं….. वो क्या जानें , मेरा हाल – ए – दिल .. उसे मायूस देख ….. ग़ुलाब की पत्तियों की तरह बिखर जाता हूँ , मैं…..   पंकजोम ” प्रेम “ »

” कश्ती – ए – मोहब्त “

दिल जब कश्ती – ए – मोहब्त पर सवार होता हैँ….. तब उनसे मुलाकात करने को दिल बेक़रार होता है…. दीदार कर उस अप्सरा का , मैंने भी मान लिया … ” एक नज़र में भी प्यार होता हैं ”   पंकजोम ” प्रेम “ »

दर्द

जब दर्द हुआ मेरे सीने में …. तो चुपके से दिल ने कहा ….. ए – सुख़नवर … ” आज थोड़ी तकलीफ़ हो रही हैँ , जीने में “…. पंकजोम ” प्रेम “ »

करामात – ए – मय देखिये..

जैसे ही शरीक हुए , महफ़िल – ए – मय में ….. जाम पर जाम होंठो  से टकराते गए….. हर एक घूंट के साथ ….. हम उनके साथ बिताये हुए , संगीन लम्हें भुलाते गए ….. करामात – ए – मय देखिये , जितना भुलाया  था उन्हें… नशा उतरने के बाद वो उतना ही याद आते रहे…..   पंकजोम ” प्रेम “ »

एक जंजीर ढूंढता हूँ ..

मुझे हमेशा तुम से बाँधें रखेँ …. इस क़ायनात में , ऐसी एक जंजीर ढूंढता हूँ …..   दौलत से सब बन जाते है अमीर … लेकिन तुझमे मैं , वो दिल वाला अमीर ढूंढता हूँ …..   बांवरा , मगर थोड़ा सयाना बन …. पार हो जाये तेरे दिल के…. मैं तरकश में ,  वो मोहब्त का तीर ढूंढता हूँ ….   पंकजोम ” प्रेम “ »

मैं लिखता हूँ मोहब्त

मैं लिखता हूँ मोहब्त को … मोहब्त की कलम से…. मैं भरता हूँ अपने ज़ख्मो को .. उसकी यादों की मरहम से… कुछ ही महफूज़ बची हैं , सांसे मेरी …. मैं ज़ी रहा हूँ आज … तो बस उसकी दुआओं के रहम से…   पंकजोम प्रेम »

सबकी कदर कर ले

बरस ना जाये फिर नैना , तू दिल मे कैद कही वो अब्र कर ले.. तो क्या हुआ , अगर कुछ ख्वाईसे पूरी ना हुई तेरी …. तू अधूरी ख्वाईसों संग पूरा ये सफ़र कर ले…   रिश्तो की रस्में दिल से निभा . शामिल उनकी हर ख़बर में , अपनी ख़बर कर ले…   जीते ज़ी का हैं सब झमेला … तू क़दरदान बन , सबकी कदर कर ले…..   खामोश लफ्ज़ो में छिपी हैँ एक ख़ुशी ….. तू वो ख़ुशी महसूस करने , थोड़ा... »

मायूस है चेहरे को रौनक

कल खो दिया मैंने वो नायाब रत्न … जिसे पाने को हर इंसान करता है , ना जाने कितने प्रयत्न ….. This Gajal Dedicate to my grandfather ….. रंज की बार – बार दरवाज़े – ए – दिल पर हुई दस्तक हैँ ….. नैना भीग गए , और मायूस चेहरे की रौनक है…. एक पल में तबाह हो गयी , ख़ुशी – ए – जिंदगी….. अंखियों के पर्दो पर , सिलसिलेवार आपकी झलक है……... »

दीदार – ए – रुख़ – ए – रोशन

उसकी यादों की बारिश से , एक एक पल है यूँ भीगा…… किया है जब से दीदार – ए – रुख़ – ए – रोशन हो गए संजीदा….. क़दम रखा जैसे ही उसने दिल के आशियाने में…. एक – एक गम का लम्हा हो गया अलविदा …. शुक्रिया अदा करते करते नहीं थकते मेरे अल्फ़ाज़ …. मेरी क़िस्मत को क्या ख़ूब ख़ुदा ने हैं लिखा….. वो मुस्कराहट की मल्लिका , जिंदगी में ले आई खु... »

क्यों तन्हा रहते हो..

जिंदगी एक बार दी है , ख़ुदा ने … फिर क्यों तन्हा रहते हो….. मैं हमराज़ हूँ , तेरे हर राज़ में .. फिर राज़ की बातें , आबो से क्यों कहते हो……   तेरी मुस्कराहट  के दीदार का दीवाना है , ये सुख़न – वर …. बेख़बर तुम हो , लेकिन मेरी रहती है , तेरी हर नज़र पर नज़र …… अनजान बन नहीं समझते मेरे लफ़्जो को …. लेकिन ग़ज़ले बड़ी ग़ौर से सुनते हो ….... »

रौनक – ए – बाज़ार

ए – ख़ुदा ….. जरा तू रौनक – ए – बाज़ार देख….   हर इंसान के चेहरे पर ….. मुस्कराहट का कारवाँ सिलसिलेवार देख …..   जरा एक निगाह , फ़लक पर डाल ….. नजारा –  ए – आतिशबाज़ी बार – बार देख …..   Happy Diwali …… PANKAJ ” prem “ »

दीपावली

सुख़ , समृद्धि और ख़ुशहाली संग ,  माँ लक्ष्मी का पूजन हो …   अपनों की , अपनों से , अपनेपन की बढ़ती चले मिठास …. और दूर सभी उलझन हो …   जब दिखे फ़लक पर , नजारा – ए – आतिशबाज़ी ….. तो हर जन – जन का , आनंदित मन हो….   ” सोनी परिवार की और से … आपको और आपके सभी स्नेहजनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें ……” &n... »

मय में भी नशा हैं

मय में भी नशा है…. लेकिन उस रुख़ – ए – रोशन की ख़ूबसूरती से कम नहीं…   हूँ जब  आज , मुस्कुराहट के आगोश में …. तो दिल कहे , अब कोई गम नहीं …   जिस दिन उंगलिया छोड़ दे , क़लम का साथ …. तो समझ लेना , इस दुनिया में हम नहीं….. »

ग़ैरों की बस्ती में , अपना भी एक घर होता

  ग़ैरों की बस्ती में , अपना भी एक घर होता.. अपने आप चल पड़ते कदम य़ु तन्हा ना य़े सफर होता…. वक्त बिताने को आवाज देती दीवारे साथ छुटने का ना कोई  ड़र होता….   गैरों की बस्ती मे अपना भी एक घर होता…   अपना कहने वाला ख़ास अपना नही फिर भी अभिनंदन होता … यहां अपने बना देते है पराया वहां पराय़ो से अपना एक बंधन होता… हर दर्द तबदील हो जाता ख़ुशी में स्वागत ही ... »