शिकार

शिकार करने चली थी बाज का,
हुस्न के गुरूर मे ।।

हँसी थामे ‘सच’ कहू …
पर भी ना मिला कबुतर का ।।
~ सचिन सनसनवाल

Comments

2 responses to “शिकार”

Leave a Reply

New Report

Close