बेटा- बेटी

जन्मे थे दोनों साथ साथ फिर भेद आ गया
क्यों मन मे।
एक बेटा है एक बेटी है सुन शोक छा गया
क्यों घर में।
भईया की बलैया की खातिर सब आए थे
बारी बारी
पर मेरी सूनी आंखों में गम देख सका था न कोई
मां तुमको तो प्यार लुटाना था पर तुम भी
आख़िर बेबस थीं
तेरी आंखों में खुशी देखने की मेरी छोटी सी चाहत थी।
दादी -दादा से कह दो एक प्यार भरा हाथ फेरें तो सही
उनकी सेवा की खातिर दरवाज़े पर मिलूंगी सदा खड़ी।
पापा की गुड़िया बन करके सपने पूरे
करना है मुझे,
घर की बिटिया बन करके आसमान
छूना है मुझे ।।

Comments

13 responses to “बेटा- बेटी”

  1. Kanchan Dwivedi

    Thanks

  2. Kanchan Dwivedi

    Thanks dear

  3. Kanchan Dwivedi

    Thank you

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar

    बहुत बहुत सुंदर रचना

    1. Kanchan Dwivedi

      धन्यवाद

  5. Kanchan Dwivedi

    Thanks alot

  6. राम नरेशपुरवाला

    Wah

  7. Kanchan Dwivedi

    धन्यवाद

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