Kanchan Dwivedi, Author at Saavan's Posts

नया साल

मेरे प्यारे नए साल क्या इस बार मै पाऊंगी अपने सपनों की दुकान जहां हर ख्वाब रखा होगा सलीके से जहां होगी जगह मेरे नए ख्वाबों की जहां होगा सम्मान मेरे आधे अधूरे कम पूरे पुराने ख्वाबों का…. जिन्हें भी मैंने एक वक़्त पर उतना ही प्यार किया जितना कि नए ख्वाबों से आज है………..😍😍 »

एहसास

क्यों झर-झर बहती आंखों में यूं आंसू बनकर आते हो, और सूखी पत्ती जैसे दूर चले भी जाते हो एहसास मेरा है नहीं तुम्हें क्या यही जताते रहते हो और चलने वाली हवा में पानी सा बहते रहते हो एक बूंद पड़ी दिल सिहर उठा जैसे की बारिश आती हो पर नहीं पता वो पानी था या केवल एक छलावा था महसूस किया जिसको मैंने, वो सपना सच था कभी नहीं इस दुनिया में गम देने वालों की कमी रही है कभी नहीं बढ़ती हूं मंजिल की तरफ़ फ़िर दिखत... »

बेटी की फ़रियाद

सारा घर दे देना पापा कोना एक बचाए रखना। हाथों को हाथ सौंपने देना उंगली एक छिपाए रखना यादों की बगिया में घर की एक छोटा फूल नाम का मेरे पानी देना- ना देना थोड़ी धूप दिखाए रखना सारा घर दे देना पापा कोना एक बचाए रखना माना परिवर्तन होगा भईया हो जाए तो होने देना हां मेरे हिस्से का प्यार सदा दराजों में बनाए रखना। जाएंगे सब आगे बढ़कर मुझको भी तो जाना होगा बीते शामों की झालर में दीपक एक सजाए रखना। सारा घर ... »

माना कि मौन हूं मैं

माना कि हूं अकेली, सहारा न चाहिए माना कि मौन हूं मै, इशारा न चाहिए। मेरी ख़ामोशी को तुम क्या समझोगे तुम तो शब्दों को जानते हो तुम्हारा नाम ‘जमाना ‘…. है तुम केवल कामयाबी पहचानते हो। »

तुम होते कौन हो उन पर रौब झाड़ने वाले

पत्नी के लिए मां बाप को डांटने वाले तुम होते कौन हो उन पर रौब झाड़ने वाले उनके समर्पण को माना भुला दिया इतना अभिमान कि उनको रुला दिया उनके एहसानो को नकारने वाले तुम होते कौन हो उनपर रौब झाड़ने वाले वक़्त बेवक्त तकल्लुफ से पाला है तुम्हें! गीले में सोकर सूखे में सुलाया है तुम्हें खुद भुखे रह हाथों से खिलाया है तुम्हें उनके हर त्याग को झूठा मानने वाले। तुम होते कौन हो उनपर रौब झाड़ने वाले लंबे सफ़र ... »

बेटा- बेटी

जन्मे थे दोनों साथ साथ फिर भेद आ गया क्यों मन मे। एक बेटा है एक बेटी है सुन शोक छा गया क्यों घर में। भईया की बलैया की खातिर सब आए थे बारी बारी पर मेरी सूनी आंखों में गम देख सका था न कोई मां तुमको तो प्यार लुटाना था पर तुम भी आख़िर बेबस थीं तेरी आंखों में खुशी देखने की मेरी छोटी सी चाहत थी। दादी -दादा से कह दो एक प्यार भरा हाथ फेरें तो सही उनकी सेवा की खातिर दरवाज़े पर मिलूंगी सदा खड़ी। पापा की गुड... »

कुछ तो

हर रोज़ उम्मीदों का बोझ लेकर बाबा खेतों तक जाते हैं। चिंता की लकीरें, सूखी कुछ- कुछ गीली आंखे लेकर लौट आते हैं। पता है छिपाते हैं कुछ, चाह कर भी ना बता पाते हैं कुछ। ‘सब ठीक होगा’ की आस में न पूछ पाते हैं कुछ।। मालूम है कि दरारें बची हैं खेतों में फिर भी उन्हें भरने चले जाते हैं, कुछ आशा से कुछ निराशा से।। आज हैं जल्दी में बाबा कुछ शायद पैग़ाम आया है ” बड़े सरकार” का कुछ इं... »

मेरे गुरु जी

कभी न भाये गुरु जी तुम, वो मैथ की मिस्ट्री,वो बोरिंग केमिस्ट्री वो छडी की मार वो डांट वो पुकार खड़े कर देना बेंच पर नज़रे रखने को कहना अपने लेंस पर कितने ही बार ज़ीरो आए गुरुजी तुम कभी ना भाए । । । । । । । । । । । । । । ये तो बचपन की कहानी थी आज हर बात आपको बतानी थी वो लड़का जिसे आपने ही संवारा था जो कभी बदतमीज और आवारा था उसने एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पुरस्कार जीत लिया है उस सम्मान को आपके हाथों स... »