मैं वो दरिया नहीं
जो वह जाऊं
किसी नाले में,
वो दरिया हूं जो
नापती हूं समंदर
की गहराई,
वो राही नहीं जो
भटक जाऊ
अपनी मंजिल से,
वो शम्मा हूं जो
बुझती नहीं
इन तूफा से,
वो दर्पण हूं जो
दिखाऊ आईना
सच्चाई का,
वो खुशबू नहीं जो
छुप जाऊं,
वो मोती नहीं जो
टूट कर मैं बिखर जाऊं |
Mai wo daria nahi
Comments
8 responses to “Mai wo daria nahi”
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Nice
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Thanks
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सुन्दर
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Thanks
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क्यूंकि नारी हूं मैं……. बहुत ही अच्छी l
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Thanks sis
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बेहतरीन
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bahut Khub
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