नारी
मन कि उषा किरणो से
वो मृद भाष
कहॉ से लायी हो
घर आंगन को महकाने का
तुम ऐसा वरदान
कहॉ से पायी हो
माँ बहन बेटी बनकर तुम
पीड़ा को छिपाने का
पहचान कहा से पायी हो
हे जननी तुम जग में
जग को रोशन
करने आयी हो
छवि तुम्हारी बलशाली हैं
अंर्तमन साहस
कहॉ से लायी हो
महेश गुप्ता जौनपुरी
मोबाइल – 9918845864
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