कुछ नहीं है

कुछ नहीं है मेरे पास,
अपना तुम्हें देने के लिए ।
मन, तो तुम्हारे पास ही है,
बेचैन तुमसे मिलने के लिए ।
दिल, तुम्हारे सीने में धड़कता है,
साँस लेता हूँ बस जीने के लिए ।
वक्त, दूसरों को बेच दिया,
जरूरतों को पूरी करने के लिए ।
खुशियाँ, तुम्हारे साथ में है,
विवश, विरह का जहर पीने के लिए ।
जिंदगी, तुम्हारे नाम ही है,
जी रहा हूँ बस जीने के लिए ।
जज्बात, बस तुम्हें दे सकता हूँ,
वजह तुम हो लिखने के लिए ।
और कुछ नहीं है मेरे पास,
अपना तुम्हें देने के लिए ।

देवेश साखरे ‘देव’

Comments

10 responses to “कुछ नहीं है”

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar

    वाह बहुत सुंदर रचना ढेरों बधाइयां

  2. NIMISHA SINGHAL Avatar

    सुंदर रचना

  3. राम नरेशपुरवाला

    Kya khoob likha h sir g

    1. देवेश साखरे 'देव' Avatar
      देवेश साखरे ‘देव’

      Thanks

Leave a Reply

New Report

Close