रंग के बहाने पी को आज छुआ जाए
सखी!
चलो भंग के बहाने कुछ बहक – बहक जाएं
सखी ! बहकने -महकने का आज लुफ्त उठाएं
सखी !
रंग के बहाने थोड़ा आज जिया जाए
सखी !
निमिषा सिंघल
रंग महोत्सव भांग महोत्सव
Comments
11 responses to “रंग महोत्सव भांग महोत्सव”
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वाह
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Thanks
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वाह बहुत सुंदर
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Thanks
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Nice
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Thanks
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Thanks
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Nice
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Thanks dear
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Nice
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Thanks
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