मोर पखा

मोर पखा सिर धरने वाले ।
उंगली पर गिरी रखकने वाले ।
है कान्ह हे नंद दुलारे हे यशुमति के प्यारे।
कृष्णा, मोहन , श्याम सब हैं तेरे नाम
द्वारिका, मथुरा , वृंदावन हैं तेरे धाम ।
हे मेरे प्यारे ये जान, जिगर , दिल, है सब , दिलवर हे तेरे नाम।

Comments

9 responses to “मोर पखा”

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar

    वाह बहुत सुंदर रचना

  2. Shivam Tomar

    धन्यवाद श्री मान जी

    1. Shivam Tomar

      Jay shree Krishna

  3. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar

    वाह बहुत सुंदर रचना

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