सिसकियाँ

कुछ ऐसा न करो के कोई तुम्हारी गवाही न दे,
आँखों की सलाखों में रखे पर तुम्हें रिहाई न दे,

जो भी कहना है उसे आईने सा साफ़ रखो तुम,
ऐसा न हो के चेहरा तुम्हें तुम्हारा ही दिखाई न दे,

क्या फायदा ऐसे हजारों दुनियां के कानों का,
जब किसीको किसीकी सिसकिया सुनाई न दे।।

राही अंजाना

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