अपने गली का होने ना दिया,
खुद के घर चैन से सोने ना दिया।
जाते-जाते मुड़ा इस कदर,
मुस्कान मेरा ले गया,
फिर भी मुझे रोने ना दिया।
अपना कह कर अपना बना ना सका,
लाकर छोड़ा इस मोड़ पर,
मुझे किसी और का होने ना दिया।
दुनिया के भीड़ में कहीं गुम हो जाऊं,
ये सोच कर घर से निकली,
उसकी याद ने ऐसे जकड़ा,
कहीं खोने ना दिया ।
याद
Comments
16 responses to “याद”
-

Nice
-

Thank you
-
-

Nice
-

Thank you sir
-

बहुत खूब
-

Thank you sir
-

धन्यवाद सर
-
-
Good
-

Thank you
-
-

उसकी याद ने ऐसे जकड़ा,
कहीं खोने ना दिया ।खूबसूरत रचना … साझा करने के लिए आपका धन्यवाद
-

Thank you sir
-
-

Nice
-

Thank you
-

वाह बहुत सुंदर
-

Thanks
-
-
वाह
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.