आंखों के सामने छा जाता है तुम्हारा सुरूर
मुझे खुद पर ही होने लगता है गुरूर
नींद भी अपना रास्ता भूल जाती है
जब याद मुझे तुम्हारी इस कदर आती है
कुछ यादें कुछ मीठी बाते
अठखेलियां करने निकल पड़ती हैं
जब ख्वाबों में तुम गलबईया डाले मुस्कुराते हो।
निमिषा सिंघल
सुरूर
Comments
10 responses to “सुरूर”
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बहुत खूब
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🌺🌺🙏🙏
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वाह
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😍😍😘😘
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Wah
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🌺🌺🙏🙏
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वाह बहुत सुंदर
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Thank you so much
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Wah
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🤣
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