गुलाबी आसमान
ख़्वाब धुंधले से
धुआं धुआं है चारों तरफ
कोई उम्मीद भी दिखाई नहीं देती
तुझे सुधारने की हर कोशिश
नाकाम ही रही
तूने कभी भी कोशिश ही नहीं की
मुझे समझने की
या शायद तुझ में
वो काबिलियत ही नहीं
जो तुम मुझे समझ पाते
गुलाबी आसमान
Comments
16 responses to “गुलाबी आसमान”
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अति सुन्दर रचना
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Thnks
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Good
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Thnks
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Good
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Thnks
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Good
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Thnks
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Good
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Thanks bhai
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Nice 💖💖
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Thanks
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💔💔💔💔💔
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Good
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ह्रदयस्पर्शी
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Very nice
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