मैं जानती हूँ कि तुम भी
मुझे ही गलत ठहराओगे
कुछ कहने से कोई फायदा नहीं—-
मैं कह भी दूँ मैं सही थी
पर तुम कहाँ मानोगे—
तुमने जो जिम्मेदारी दी थी
उसी को पूरा कर रही हूँ —-
तुम्हीं ने कहा था:-
‘ना किसी की तुम सहना’—
वही कर रही हूँ
पर तुम कहाँ मानोगे
क्यूँ बुरा लग रहा है जब
बात अपनों पर आई—
मै जानती हूँ
तुम मुझे निर्दोष मानोगे नहीं
तुम्हारी संगत में थोड़ी
निर्भीक हो गयी हूँ
मै जो कर चुकी हूँ
वो सही था पर तुम कहाँ
मानोगे
तुम्हारी ही तरह सनकी सी
हो चुकी हूँ जब बात अपनों पर
आयी तुम मानोगे नहीं
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