सीतापुरिया अवधि:-
राति क द्याखँइ चांद-सितारा
दिनमाँ चांद निहारइ
दिन भरि छोटुआ-छोटुआ
कहिके अम्मा लाल पुकारइ
अम्मा भई बाँवली।
टूटी खटिया फटी चटाई
जब अम्मा पहुड़इ
चरमर-चरमर होइगइ पाई।
अम्मा भाई बाँवली…
घुटनन माँ तनिकऊ
बूत नाइ
तबहूँ लाठी लइकई
दिनु भरि
आइसी–वइसी दऊरईं ।
अम्मा भई बाँवरी…
बहुरिया लईके आवइ खाना
बुदु बुदु बुदु बुदु
अम्मा ब्वालई।
अम्मा भई बाँवली…
अम्मा भई बाँवली..
Comments
8 responses to “अम्मा भई बाँवली..”
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बहुत नीक कविता हइ 👏👏👏
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धन्यवाद
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वेलकम
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वाह
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🙏
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😃😃😃🙏🙏🤦♂️
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धन्यवाद आपका बहुत बहुत आभार
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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