दिल का सुनो

दिल की सुनो दिल से करो बात,
इंसानियत को जगाओ मित्र करो ना रात।
रब से करो तुम अपने दुख का फरियाद,
अपने प्यार को लुटा नफरत को दो मात।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

Comments

6 responses to “दिल का सुनो”

  1. Anita Sharma

    👌

  2. Satish Pandey

    दिल की सुनो
    वाह

  3. अपने मन के कोमल भावों को कवि ने कविता में व्यक्त किया है

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