जब तलक मानव को
मानव मात्र से,
भेद की नजरों से देखूं तब तलक।
जब तलक समभाव मेरे में न हो,
तब तलक कविता कहूँ तो
झूठ है।
कर्म मेरा नीच है तो
कवि नहीं,
दृष्टि मेरी नीच है तो
कवि नहीं।
जो लिखूं कविता,
मुझे हक भी नहीं।
—- डॉ0 सतीश पाण्डेय
कवि
Comments
9 responses to “कवि”
-

गजब
-
Thanks
-
-

Sateek baat
-
Dhanyawad
-
-
Nice
-
धन्यवाद सर जी
-
-
👏
-
👏
-
वेलकम
-
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.