सूरज

भोर हो रही है
धीरे-धीरे
सूरज की धमक बढ़ रही है,
थोड़ा किनारे हो जा
बादल के टुकड़े,
आज पूरी तरह चमकने दे उसे,
तू इक्कट्ठा कर आज
अपने सारे अंश
कल बरस लेना पूरी शिद्दत से,
आज उजाला होने दे।

Comments

7 responses to “सूरज”

  1. Satish Pandey

    धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      जी सर धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      👏

      1. Abhishek kumar

        वेलकम

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