स्वप्न में ही

हमारी ओर से शुभरात्रि
कह देना उन्हें कविता,
साथ ही यह भी कह देना कि
सपने में चले आना।
कहीं पर बैठ करके
प्यार की दो बात कर लेंगे।
जागते में हमें संसार
मिलने ही नहीं देगा।
इसलिए स्वप्न में ही
प्यार की दो बात कर लेंगे।
—डॉ0 सतीश पाण्डेय, चम्पावत।

Comments

6 responses to “स्वप्न में ही”

  1. Satish Pandey

    👏

    1. Satish Pandey

      Thanks

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