चलो इंसान बनते हैं।
कब तक जकड़े रहेंगे ,
हम भेदभाव की जंजीरों में ।
कब तक पकड़े रहेंगे हम ,
धर्म- भ्रम की बेड़ियों से।
मानवता की चलो ,
पहचान बनते हैं
भगवान तो ना ही सही ,
चलो इंसान बनते हैं।
चलो इंसान बनते हैं।
कब तक जकड़े रहेंगे ,
हम भेदभाव की जंजीरों में ।
कब तक पकड़े रहेंगे हम ,
धर्म- भ्रम की बेड़ियों से।
मानवता की चलो ,
पहचान बनते हैं
भगवान तो ना ही सही ,
चलो इंसान बनते हैं।
Nice
🙏
मानवता की चलो ,
पहचान बनते हैं
वाह , बहुत ही सराहनीय
हृदय की गहराइयों से,आपका बहुत-बहुत आभार 🙏😊
बहुत सुंदर
बहुत-बहुत आभार
सुंदर भावना.
बहुत बहुत धन्यवाद
Very nice
बहुत बहुत धन्यवाद
सुन्दर
🙏
Nice
मानव को अच्छी सीख देती हुई रचना कवि की भावनाएं बहुत ही उत्तम है तथा मानव में जागरूकता लाने वाली हैं
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