चलो इंसान बनते हैं।

चलो इंसान बनते हैं।

कब तक जकड़े रहेंगे ,
हम भेदभाव की जंजीरों में ।
कब तक पकड़े रहेंगे हम ,
धर्म- भ्रम की बेड़ियों से।

मानवता की चलो ,
पहचान बनते हैं ‌
भगवान तो ना ही सही ,
चलो इंसान बनते हैं।

Comments

14 responses to “चलो इंसान बनते हैं।”

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      🙏

  1. Satish Pandey

    मानवता की चलो ,
    पहचान बनते हैं ‌
    वाह , बहुत ही सराहनीय

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      हृदय की गहराइयों से,आपका बहुत-बहुत आभार 🙏😊

  2. Vasundra singh Avatar
    Vasundra singh

    बहुत सुंदर

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत-बहुत आभार

  3. Mrunal ghate

    सुंदर भावना.

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      🙏

  4. मानव को अच्छी सीख देती हुई रचना कवि की भावनाएं बहुत ही उत्तम है तथा मानव में जागरूकता लाने वाली हैं

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