चाहत तुम में भी मुझ में भी
मैं भी साधारण मानव हूँ,
तुम भी साधारण मानव हो
कमियां तुम में भी मुझ में भी
आंसू तुम में भी मुझ में भी।
गलती तुम से भी हो जाती है
गलती मुझ से भी हो जाती है,
गलती अपनी गलती का
अहसास हमें करवाती है।
आ अब गलती की खोज नहीं
कमियों की कोई ढूंढ नहीं,
आ प्यार करें इक-दूजे से
चाहत तुम में भी मुझ में भी ।
—- Dr. satish Pandey
अतिसुंदर
धन्यवाद जी
मनुष्य की कमियों और अच्छाइयों को आत्मसात करती हुई रचना कवि की कोमल भावनाओं को प्रदर्शित कर रही है
धन्यवाद