सरमाए

कभी इस तरफ देख लिया करो
हम कभी तुम्हारे सरमाए थे
हर ग्येर से बात करते हो
हम तोह तुम्हारे अपने थे

Comments

5 responses to “सरमाए”

  1. गैर, तो
    अपने ही अपनों के दुश्मन बन जाते हैं गैर तो कुछ नहीं बिगाड़ पाता
    अपने ही कातिल बन जाते हैं।

    1. Antariksha Saha Avatar
      Antariksha Saha

      धन्यवाद

  2. सामयिक परिवेश में सटीक बैठता है। देखने में छोटा पद है पर बड़ा गहरा भाव रखता है।
    खूब

  3. Satish Pandey

    बहुत सुंदर, लेखनी को सलाम

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