रक्षाकवच

राखी का त्योहार है आया
भाई बहन का प्यार समाया
रोली, चंदन,मीठा, अक्षत
रक्षाकवच के साथ सजाया

सूनी कलाई पर बहन ने अपना
स्नेह भरा एक धागा बाँधा
भाई ने अपनी बहना को सारा
आशीषों का हार पहनाया

सारी बलाओं से दूर रह भईया
बहन ने प्रभु से यह वर मांगा
भाई ने अपनी बहन से अपना
अंगरक्षक सा साथ निभाया

राखी पर यही दुआ हमारी
सूनी न रह कलाई तुम्हारी
रहे सदा अनमोल ये बन्धन
शुभकामनाएं यही दिल से हमारी।।

Comments

6 responses to “रक्षाकवच”

  1. Satish Pandey

    वाह बहुत खूब

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर रचना

  3. Neha Avatar
    Neha

    Thank u so much

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