हर समस्या का समाधान है

है समाधान सभी समस्याओं का,
भीरू-डरपोक नहीं चलाते राजव्यवस्था को ।
वो लूटते जग को और शोषण करते आमजनता पर ।
कर को खर्च करते हैं, वो निज-अपने स्वार्थ में
और आमजनता को प्रताड़ित करते वो निज-अपने शासन-काल में ।
राष्ट्रहित उन्हें भाता नहीं, वो इन्द्रिय-विलास में संलिप्त रहते हैं ।
वो राष्ट्रविकास नहीं कर सकते, वो अपने विकास में तत्पर अड़े रहते हैं ।

वो राज नहीं, वो व्यवस्था नहीं जिनके राजा राम तपस्वी नहीं ।
यह तो शासन है हिरण्यकश्यप का, इसमें भक्त प्रहलाद को कोई स्थान नहीं ।
पांडव हार गये घर की लाज, कौरव चले शकुनि की चाल ।
धृतराष्ट्र के राजदरबार में लूटती है नारी का लाज,
और बचा नहीं पाते वीर धनूर्धर अर्जुनसात महारथी महान ।
थक गई मदद माँगते-माँगते, चिखती रही न्याय के लिए ।
पर कु मौन के सिवाय, थक-हार गई जहां से,
ध्यानमग्न हो गई वो बीच दरबार में कृष्ण के प्रति ।
दुस्साहस थक गया, कृष्ण की महिमा देख अचम्भित रह गया संसार ।
इस कलिकाल में भी हरदिन लुटती नारी की मान है ।
अपहरण होते बच्चे व नवजात-शिशु को कहना पड़ता अलविदा ए-संसार ।।
कवि विकास कुमार

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