तेरी वेवफाई थी बहुत ही निराली ।

तेरी वेवफाई थी बहुत ही निराली ।
तु जाते-जाते यूँ किसी को चाहा ।
मगर वो बंदा हुआ न किसी का ।
तेरी वेवफाई थी बहुत ही निराली ।।1।।

सख्श था वो बहुत भोला-भाला ।
तेरी मुहब्बत में आहें भरता था ।
तेरा नाम ले ले के दिन काटता था रात रोता था ।
तेरी वेवफाई थी बहुत ही निराली ।।2।।

मगर संगदिल तुम छोड़ा उसका ऐसे वक्त साथ छोड़ा ।
कि अब वो बेचारा रह न किसी का ।
तोड़ना न दिल किसी का ऐ दोस्त, यार मेरा ।
तेरी वेवफाई थी बहुत ही निराली।।3।।
कवि विकास कुमार

Comments

3 responses to “तेरी वेवफाई थी बहुत ही निराली ।”

  1. Satish Pandey

    Good

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