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शायरी संग्रह भाग 1

By विकास कुमार Posted on August 2, 2020 Category :
  • शेर-ओ-शायरी

मुहब्बत हो गयी है गम से,
खुशियाँ अच्छी नहीं लगती।
पहले दुश्मन मुहब्बत करते थे,
अब दोस्त नफरत करते हैं।।1।।
 विकास कुमार कमति..
बदलते वक्त के साथ,
उसकी आँखें भी बदल गयी।
पहले मुहब्बत भरी निगाहों से देखती थी,
अब शक भरी निगाहों से।।2।।
 विकास कमार कमति..
सुना था लड़की बेवफा होती,
मौलिकता गुण होती,
उनके रगों में बेवफाई की।
आज पता चला,
मर्दों की मंडी में भी बेवफाई बिकती।। 3।।
 विकास कुमार कमति..

संजोते गये ख्या़बों की गठरियाँ,
इक दिन ऐसी बरसात आयी की।
उसकी डॉली निकली,
और मेरी बारात, फर्क़ सिर्फ़ ये था कि वो।
रो रही थी, और मैं हँस रहा था,
क्योंकि वो जिन्दगी जीने जा रही थी।
और मैं जिन्दगी जी चुका था।।4।।
 विकास कुमार कमति..

मेरी इतनी औकात नहीं,
कि मैं तेरे जुल्फें तले सो सकूँ।
मेरे लिए मुहब्बत भरी निगाहें ही सही।।5।।
 विकास कुमार कमति…

मेरी मुहब्बत कोई जिस्मानी संबंध नहीं,
जो क्षणभर में लुप्त हो जायें।
मेरी मुहब्बत तो इच्छा है,
जो तेरे साथ ही जायेगी।।6।।
 विकास कुमार कमति…

बहुतेरे को स्त्री ने बदल दी,
कोई कालि बने, तो कोई तुलसी।
अब मेरी बारी है, जरा हमें भी बदल दें।।7।।
 विकास कुमार कमति…

जानता हूँ मैं, मुहब्बत करती हैं, मुझसे तू।
तु कहने में शर्माती, मैं बोलने में लजाता।।8।।
 विकास कुमार कमति…

तेरी अदायें देखकर,
मुहब्बत हो गई तुमसे।
तेरा व्यवहार देखकर,
रोना आ गया खूद पे।।9।।
 विकास कुमार कमति…

तेरी बेवफाई ने शायर,
बना दिया मुझको।
ऐ! दिले गुलजार,
जरा वफा तो दिखा,
इंसान बनने को जी चाहता।10।।
 विकास कुमार कमति..

आग उधर भी लगी है, आग इधर भी लगी है।
उधर सहनशक्ति ज्यादा,
इधर बर्दाश्त करने का क्षमता कम।।11।।
 विकास कुमार कमति..
साख की जमीं पर थमीं थी,
अपनी मुहब्बत की मंजिल।
जरा शक क्या हुआ ?
खाक! में मिला दी।।12।।
 विकास कुमार कमति..
तेरी हुस्न की तारीफ़, क्या करूँ? जानम!,
नजर थमती नहीं तेरे बदन पे।
जरा नजरें तो मिला,
आँखों में समाने को जी चाहता।।13।।
 विकास कुमार कमति..

थक गया हूँ, संसारिक ग्यान अर्जित करते-करते।
अब आध्यात्मिकता में रूझान अच्छा लगता।।14।।

 विकास कुमार कमति..

वक्त हर समस्या का समाधान होता है।
वक्त के साथ चलना चाहिये।।15।।
 विकास कुमार कमति..

मेरी प्रेरणा है तु, जरा रूख़ से नाकाब़ हटा।
दुआ माँगता हूँ, रब से जीने के वास्ते।।16।।
 विकास कुमार कमति..

रूठ़ गई जिन्दगी, तेरा इन्तजार करके।
खो गई कहाँ तू, वफा करके।।17।।

 विकास कुमार कमति..

क्यूँ सितम कर रही हो,
इन बेवस-बेजुवान हवाओं पे।
कसूर तो मेरा था, जो बाँधा था,
जुल्फें तेरे कहने पर हमने।।18।।

 विकास कुमार कमति..

रूठ गई जिन्दगी, तेरे जाने के बाद।
कमबक्त! मौत भी नहीं आती,
तेरे आने के बाद।।19।।

 विकास कुमार कमति..

जी ली अपनी जिन्दगी,
तुने किसी के जिन्दगी बर्बाद करके।
जरा बता संगदिल! कैसी दिललग्गी रही।।20।।
 विकास कुमार कमति..

मुक्त कर दो, इन बेवस हवाओं को।
सितम ढ़ाने के लिए, मैं हूँ ना,
हम पे ढ़ा लेना।।21।।

 विकास कुमार कमति..

ना दौलत की कमी , न शोहरत की कमी,
ना एैश्वर्य की कमी।
एक कमी थी, तेरी वो खत्म हो गई,
तेरे जाने के बाद।।22।।
 विकास कुमार कमति..

कुछ दर्द तेरे जाने के बाद रहा,
कुछ दर्द तेरे आने के बाद रहा।
बीच का सिलसिला, यूँहीं बेकार रहा।।23।।
 विकास कुमार कमति..

रूठ़ कर कहाँ चली मेरी जानम,
जरा वक्त तो दे संभलने का।
साथ-साथ बेवफाई निभायेंगे।।24।।
 विकास कुमार कमति..

तेरी बेवफाई ने इक नया मोड़ दी।
तु किसी और के साथ,
और कोई और मेरे साथ चलीं।।25।।

 विकास कुमार कमति..

रोता नहीं हूँ अब मैं,
मेरे अश्क अब बहते नहीं।
जब तुने जिन्दगी जी ली,
किसी के साथ घर बसाकर।
तो हमने भी वफा निभा दी,
किसी और के साथ।।26।।

 विकास कुमार कमति..

बिखड़ाकर जुल्फें न चला कीजिए जानम!।
हम आशिको! को ऐसे न तड़पाया कीजिए जानम! ।।27।।
 विकास कुमार कमति..


मत कर ग़ुरुर अपने हुस्न पर मेरी जां।
ढ़ालता सभी का ये, बस इन्तेजारे वक्त का!।।28।।

 विकास कुमार कमति..

वो वक्त भी क्या थी तेरे जानम,
लाखों दिवाने मरते थे तुझपे।
अब मैं मरता हूँ तेरे वास्ते! मुहब्बत के आस्थे।।29।।
 विकास कुमार कमति..

तेरे जुल्फें को गुत्थें कभी,
काश! हमारे पास बैठते।
मँझधार में ना डूबते कभी,
काश! तुम्हारे सहारे मिलते।।30।।
 विकास कुमार कमति..

तेरी बेवफाई के किस्से,
गैरों से सुनते, तो खंजर सा लगता दिल पे।
ना जाने! कौन सी वो मनहूस घड़ी थी,
जो दिल तुझपे लगी।।31।।
 विकास कुमार कमति..

बेरहम! इतना तो रहम करता,
अपने लिये ना सही।
किसी और के लिए, तो छोड़ता।।32।।

 विकास कुमार कमति..

तू वफा नहीं बेवफा है,
तू रहमदिल नहीं, बेरहम है।
तु, तु नहीं,मैं में गुम- गुम है।।33।।

 विकास कुमार कमति..

छोड़ दी सारी दुनिया मैंने तेरे खातिर।
तु छोड़ ना सकी, किसी को मेरे खातिर।।34।।

 विकास कुमार कमति.
हमने वफा तुझसे की, तुमने किसी और से की।
और उसने तिहि और से की। सच तो है– वफा कोई किसी से की ही नहीं।।35।।
 विकास कुमार कमति..

सारा जहां सोता, तू भी सोती बेवफा बनकर। हम तेरे विरह में रात में रोते, और दिन में सोते।।36।।
 विकास कुमार कमति।।

कुछ वक्त जो तेरे साथ गुजारे, वो वक्त नहीं तेरे हँसने और मुस्कुराने के दिन थे। कहाँ चली मेरी जां, विरह के आग में झोंक के, जाते-जा हवा तो देती जा।।37।।
 विकास कुमार कमति।।

साथ-साथ ही अपनी डॉली उठेंगी, फर्क़ सिर्फ ये होगा। तेरे पिया तेरी घुंघट उठायेंगे, और मेरे पिया मेरे कफन।।38।।
 विकास कुमार कमति।।

तेरे याद में लिखें हमने सैकड़ों शेर।
ये शेर नही,अपनी मुहब्बत की दास्तां है।।39।।
 विकास कुमार कमति।।

मेरे खूदा मेरे महबूब को सलामत करना। अगर गम हो, उन्हें तो दर्द हमें देना।।40।।
 विकास कुमार

मेरी जां रूठ़ी हो, तुमझे क्या ? क्या आप नहीं जानते, क्रोध स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है। मेरे दोस्त, मेरे भाई !, क्यूँ खफा हो ? मुस्कुराकर जिओ ना!।।41।।

 विकास कुमार

जरा पूछ ए मेरे दोस्त इनसे, इन्हें मुफ़लिसी से इतनी मुहब्बत क्यूँ। इन्हें खेलने के लिए मुफ़लिस और झेलने के लिए रईस चाहिए, क्या यही इनकी मुहब्बत है?।।42।।
 विकास कुमार कमति।।

तुझे देखूं को दिल को शकुन सा मिलता। तुझे ना देखूं तो मायूसी सी छाई रहती।।43।।
 विकास कुमार

यह सच हैं कि आप जिससे मुहब्बत करते हो। वो भी आपको चाहता है, पर वो बोल नहीं सकता और आप कह नहीं कहते।।44।।
 विकास कुमार

तु ऐसी ही करतुतें दिखाती रहो, अपनी संस्कारों की,और मैं लिखता रहुँ मानवोंहित के बारे में।।45।।
 विकास कुमार

मानता हूँ,वक्त सभी जख़्मों का मरहम है। ये वक्त ही है। जो बेनाम रिश्ते बनाते है। कुछ दिल में बसते है,कुछ दिमाग में।।46।।
 विकास कुमार

यह मन का लगाव भी कुछ अजीब सा होता है।
जिसको लगी उसकी जुबां चली जाती है।।47।।
 विकास कुमार

यह मन का लगाव भी कुछ अजीब सा होता।
जिसको लगा वो जुबां रहते बेजुबां हो जाते।।48।।
 विकास कुमार

वो राती में सोती,हम दिन में सोते।
वो रात में भोग करती,हम दिन में योग करते।।49।।
 विकास कुमार

प्यार दो व्यक्तियों के बीच का वह सम्बन्ध है। जिन्हें सिर्फ महसूस किया जा सकता है।।50।।
 विकास कुमार

प्यार को परिभाषित करना,प्यार को अपमानित करने के समान है,क्योंकि समय और परिस्थिति के अनुकूल इनके अलग-अलग प्रकार हो सकते है।।51।।
 विकास कुमार

प्यार करने वाले एक नदी के दो राही है। जो कभी नहीं मिलते है। प्यार एक एहसास का नाम है। यह ईश्वरीय देन है। यह सेवा का दूसरा नाम है।।52।।
 विकास कुमार

कुछ दोस्त जो हमें प्रोत्साहित करते है। वो दोस्त नहीं,हमारी दिल की धड़कन व आत्मविभोर की कल्पना है। कुछ लोग जो चुप रहते हैं। वो हमारी सोच व चिंतन की विषय है। मेरी महबूब की हरकतें,मेरी लेख है,और उनकी वेबफाई मेरी कलम उठाने की वजह।।53 ।।
 विकास कुमार

जो मुहब्बत करते,सो इजहार नहीं करते। जो इजहार करते सो,मुहब्बत नहीं करते।।54।।
 विकास कुमार

इजहार दो प्रेमियों के बीच का सबसे सन्देहजनक शब्द है।।55।।
 विकास कुमार

हमने कुछ ऐसी भी प्रेमिकाओं के देखा हैः- जो अपने प्रेमी के खतों को अखबारों में छपवाना पसंद करती है।।56।।
 विकास कुमार

वो दुहाई देती रही अपनी सभ्यता का। मैं देखता रहा उनकी संस्कारों को।।57।।
 विकास कुमार

तु अच्छी नहीं,बुरी है,क्योंकि तेरे अन्दर आत्मा नहीं,प्रेतात्मा का वास है। अतः तु अहंकार की दुनिया में खोई हुई एक बहुत ही सुन्दर खुबसूरत,हसीं,जवां बूत के स्वरूप में मेरे समझ खडी है। बता संगदिल क्या नाम दू तुझे।।58।।
 विकास कुमार

तेरी महफ़िल में कुछ ऐसे भी तेरे यार-आशिक होंगे। जो तेरे दिलो-दिमागो,हुश्नो-शरीरों,आत्मा-रूहों व तेरी आबरू को भी लूटेंगे। तू बेह्या की तरह सबकी मनोकामना पूर्ण करेगी। हमने देखा है। तुझे जवान होते हुये भी. तू करतुते करती बच्चों वाली. दुहाई देती है. अपनी ऊँची आदर्शों सभ्यता-संस्कृति व भाषा की. और करतुतें करती विदेशों वाली।।59।।
 विकास कुमार

तेरे साथ जो हुआ वो तेरे ही नादानी की सजा थी. अब उसके साथ जो होगा. वह उसके वेवफाई की सजा होगी. क्योंकि वह अच्छी थी. इसलिए उसके साथ बुरा हुआ. और मैं बुरा था. इसलिए मेरे साथ अच्छा हुआ।।60।।
 विकास कुमार

जय श्री सीताराम ।।

नाम विकास कुमार
पिता भोल कमति
माता फूलकुमारी देवी
घर मोहनपुर
राज्य बिहार
जय श्री सीताराम ।।

विकास
विकास कुमार

5 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' Pt, vinay shastri 'vinaychand' says:
    August 2, 2020 at 1:14 pm

    Nice

    Log in to Reply
  2. Pragya Pragya says:
    August 2, 2020 at 1:26 pm

    👌👌

    Log in to Reply
  3. Sulekha yadav says:
    August 2, 2020 at 2:00 pm

    nice

    Log in to Reply
  4. Satish Chandra Pandey Satish Chandra Pandey says:
    August 2, 2020 at 2:11 pm

    बहुत खूब

    Log in to Reply
  5. Geeta Geeta kumari says:
    August 2, 2020 at 3:02 pm

    सुंदर रचना

    Log in to Reply

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