इक खुशी की चाह में ,
कितने गमों को गले लगाया हैं,
सुकून तो मिला ही नहीं,
अब दर्द से ही काम चलाया है!
खुशी की चाह
Comments
9 responses to “खुशी की चाह”
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वाह वाह
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बहुत-बहुत आभार 🙏शास्त्री जी
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बहुत ख़ूब..
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बहुत बहुत धन्यवाद 🙏 जी
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bahut khoob sir
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बहुत बहुत आभार 🙏
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वाह जी वाह
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धन्यवाद 🙏 जी
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बहुत सुंदर
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