एक तो तुम बड़ी मुश्किल से

एक तो तुम बड़ी मुश्किल से
मुस्कुराती हो,
दूसरा मन ही मन में
सारे गम छुपाती हो।
जब कभी चाँद को
बादल चुरा सा लेता है,
तब हमें रोशनी बन
रास्ता दिखाती हो।

Comments

14 responses to “एक तो तुम बड़ी मुश्किल से”

    1. सस्नेह धन्यवाद

    1. बहुत बहुत आभार

    1. धन्यवाद शास्त्री जी

  1. सादर धन्यवाद, इन कविताओं के लिए,

    1. बहुत खूब

    2. सादर धन्यवाद जी

  2. Geeta kumari

    बहुत ख़ूब

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद ji

  3. Kumar Piyush

    बहुत खूब

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