19 Comments

    1. आज तो धन्यवाद शब्द छोटा पद रहा है सर…कवि शिरोमणि की इतनी सुंदर समीक्षा। बहुत बहुत आभार 🙏🙏

  1. कई मिले तो शहर बस गया,
    उड़े परिंदे तो सुबह हो गया|
    नित दिन संदेशा लाते,
    उठो उठो अब सुबह हो गया|

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