ये कोरोना की बीमारी,
ना इंसान से डरी ना हारी ।
इसने इतने सबक सिखाए ,
ज़िन्दगी में किसी ने नहीं सिखाए ।
कोई कहे काढ़ा पीलो, कोई जड़ी – बूटी बताए ।
तुक्का मार रहें है ऐसे……
जैसे परीक्षा में कोई प्रश्न “आऊट ऑफ सलेबस” आए ।
तौबा है इससे , कोई तो इसकी वैक्सीन बनाए ।
घर में दुबके बैठे हैं, कोई इतना भी ना सताए ।
कोरोना की बीमारी
Comments
26 responses to “कोरोना की बीमारी”
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तौबा है इससे , कोई तो इसकी वैक्सीन बनाए ।
घर में दुबके बैठे हैं, कोई इतना भी ना सताए ।
बिल्कुल ही सटीक लिखा है आपने। यह एक ऐसा रोग है जिसने मानव जाति को झकझोर दिया है।-
जी बिल्कुल। Thanks for your pricious complement 🙏
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Very nice
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Thank you very much mam 🙏
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बहुत ही बढ़िया, wow
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बहुत बहुत धन्यवाद आपका सर🙏… बहुत बहुत आभार
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Nice
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Thank you very much kamla mam🙏
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Very Nice Poem
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Thank you very much Indu ji🙏
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Very nice lines
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Thank you very much Pratima ji🙏
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✍👌
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Thank you 🙏🙏
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सुन्दर
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Thank you 🙏
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बहुत खूब
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बहुत बहुत शुक्रिया जी 🙏
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बहुत खूब, शानदार
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💐 आपकी सुंदर समीक्षा के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ईशा जी💐
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सुन्दर प्रस्तुति
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बहुत बहुत धन्यवाद जी 🙏
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अतिसुंदर
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धन्यवाद भाई जी 🙏… स्नेह यूं ही बनाए रखना
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sahi baat kahi
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Thanks allot Indu ji🙏
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