12 Comments

  1. यूँ ही उत्साह में रह वो उगते हुए कवि
    कल तुझे सारा जहान रोशन करना है।
    बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ सृजित की हैं प्रज्ञा जी। जय हो, लेखनी यूँ ही निखरती रहे।

  2. सावन मंच के प्रति बेहद प्रेम को प्रकट करती ,बहुत सुंदर पंक्तियां
    बहुत अच्छे प्रज्ञा जी यहां पर लगभग सभी सदस्यों का यही हाल है, बहुत लगाव हो गया है सावन से ,जो यहां पर आता है इसी का हो जाता है।

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