नए युग का सूत्रपात

चल साथी चल करें हम
नये युग का सूत्रपात
बढ़ चलें नवीन पथ पर
हाथों में लेकर हाथ
ना जाति-पांति के बंधन हों
ना मरी हुई संवेदनाएँ
ना लाशों के ढेर लगे हों
ना आगे बढ़ने की आपाधापी
हों स्वर्णिम स्वप्न और
हों प्रेम के प्यारे बंधन
हाथ बढ़ाकर सब सहयोग करें
थके ना फिर कोई यौवन
ना हो व्यथा ना कोई व्यथित हो
सबके मन में प्रेम फलित हो।।

Comments

16 responses to “नए युग का सूत्रपात”

  1. Virendra sen Avatar
    Virendra sen

    खूबसूरत रचना है रचनाकार की

  2. Pratima chaudhary

    बहुत सुंदर भाव

    1. Pragya Shukla

      🙏🙏

  3. सुन्दर अभिव्यक्ति

  4. Satish Pandey

    बहुत शानदार अभिव्यक्ति

  5. This comment is currently unavailable

  6. बेहद शानदार रचना

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