क्यों मनाएं किसी को।

क्यों मनाएं किसी को,
रूठना हमें भी आता है।
जो भूले बैठे हैं हमें,
भुलाना हमें भी आता है।

Comments

14 responses to “क्यों मनाएं किसी को।”

  1. बहुत सुन्दर रचना

  2. सुन्दर पं्तियां

  3. 😃😃😃👌✍✍✍✍

  4. Pratima chaudhary

    Thank you

  5. Deep

    खत्म कर दिया किस्सा, अब रुठने मनाने का.. सुना है वो शख्स हैरान है, मेरे इस रवैये से..

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