क्यों मनाएं किसी को,
रूठना हमें भी आता है।
जो भूले बैठे हैं हमें,
भुलाना हमें भी आता है।
क्यों मनाएं किसी को।
Comments
14 responses to “क्यों मनाएं किसी को।”
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बहुत सुन्दर रचना
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Thank you
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सुंदर
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धन्यवाद सर
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सुन्दर पं्तियां
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धन्यवाद जी
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😃😃😃👌✍✍✍✍
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🙏
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बहुत उम्दा
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Thank you
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खत्म कर दिया किस्सा, अब रुठने मनाने का.. सुना है वो शख्स हैरान है, मेरे इस रवैये से..
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धन्यवाद
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Oh kya bat hai
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धन्यवाद
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