इश्क आँच पर पकता रहा…

यूँ ही सिलसिला चलता रहा
कभी मैं कभी वो रूठता रहा
टूटने लगे दिल बेतहाशा
मगर इश्क आँच पर पकता रहा..

Comments

14 responses to “इश्क आँच पर पकता रहा…”

  1. Geeta kumari

    वाह, बहुत ख़ूब

  2. वाह वाह, श्रृंगारिक रचना, जद्दोजदह के बावजूद प्रेम के जिंदा रहने की रचना, बहुत ही लाजवाब।

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    1. Pragya Shukla

      Thanks

    1. Pragya Shukla

      धन्यवाद

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