अब हमारे तेवर

अब हमारे तेवर
कम हो गए हैं,
क्योंकि अब तुम्हारे
हम हो गए हैं।
अब कहाँ समय
जो कि बेकार घूमें
तुम्हारी मुहब्बत में
हम खो गए हैं।

Comments

14 responses to “अब हमारे तेवर”

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    सुंदर

    1. बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

    1. धन्यवाद जी

  2. Geeta kumari

    बहुत सुंदर श्रृंगारिक रचना…. बेहतरीन प्रस्तुति ।
    .

    1. बहुत बहुत धन्यवाद, आभार, अभिवादन, गीता जी

  3. सुन्दर प्रस्तुति

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

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