क्या नया है इस जीवन।

क्या नया है इस जीवन में,
वही रोज की शाम सुबह है।
जब हम थक जाते हैं,
फिर उम्मीद के झरोखों से,
झाकते हैं।
बदल जाता है वह सब कुछ,
हर सुबह न‌ई-सी लगती है,
और हर रात-सी न‌ई लगती।

Comments

12 responses to “क्या नया है इस जीवन।”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    बहुत खूब

  2. बहुत ही उम्दा

    1. धन्यवाद मैम

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बहुत सुंदर पंक्तियां

  4. Deep Patel

    फिर सुबह एक नई रोशन हुई,
    फिर उम्मीदें नींद से झांकती मिली,
    वक़्त का पंछी घरोंदे से उड़ा,
    अब कहाँ ले जाए तूफाँ क्या पता|

    1. बहुत सुंदर पंक्तियां
      हार्दिक धन्यवाद

  5. बहुत उम्दा लिखा आपने

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

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