कल तलक फिरता था

कल तलक फिरता था वह मेरा बनके दीवाना
हम आंखों ही आंखों में बात किया करते थे
आज बहुत दूर है वो हमसे मगर फिर भी
हम सपनों में उनसे रोज़ मिला करते हैं।

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4 responses to “कल तलक फिरता था”

  1. सुन्दर अभिव्यक्ति

  2. Geeta kumari

    सुन्दर भवाभियक्ती

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