है निशानियां तेरी,
इन फिजाओं में।
कभी चांद तो ,
कभी सितारे कहते हैं।
कहते हैं मुड़ कर देख।
जिसे तू चाहता है,
वह वही है।
जिसे हर रोज तू पाता है।
याद वही सिमटी हुई है।
जिससे हर रोज,
तू गले लगाता है।
कभी छुप कर देख लेना।
जो कभी खत्म ही ना हो।
वह प्यार उसे कौन मिटाता है।
है निशानियां तेरी इन फिजाओं में।
है निशानियां तेरी….
Comments
8 responses to “है निशानियां तेरी….”
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बहुत सुंदर
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धन्यवाद
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अतिसुंदर भाव
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धन्यवाद
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बहुत सुंदर
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धन्यवाद
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बेहतरीन
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Thank you
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