यह कैसी है आपदाएं।

यह कैसी है आपदाएं,
कितना विनाश करती हैं!
छीन कर सब मेरा,
और मुझसे सवाल करती है।
बाहर की भीषण तबाही,
मेरे भीतर तक मचती है।
सुख-चैन गंवा कर जोड़ा था,
जिंदगी भी तौबा करती है।
थक कर बैठ जाऊं?
या फिर से करू,
तुम्हारा सामना।
ना जाने वो भीतर की ममता,
स्नेह ,करुणा।
जो निष्ठुर हो चुकी है,
तेरे जाने के बाद।
वह फिर से अमृत वर्षा करती हैं।
जिसे कभी अपना नहीं माना,
आज उसी को अपनाती है।
यह कैसी है आपदाएं,
कितना विनाश करती हैं।
देख कर दूसरे के आंसू,
अब अपनी कहानी याद आती है।
पत्थर-सा सीना रखने वाला मन,
आज करुण वर्षा करता है।
यह कैसी है आपदाएं,
कितना विनाश करती हैं।

Comments

12 responses to “यह कैसी है आपदाएं।”

  1. Priyanka Kohli

    अति सुन्दर!❤

    1. धन्यवाद प्रियंका

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    जब तक हमारे ऊपर कोई मुसीबत नहीं आती है तब तक हम दूसरों के दुख को महसूस नहीं कर पाते हैं यही कविता में बहुत ही अच्छी तरीके से बताया गया
    बहुत सुंदर भाव

    1. हार्दिक धन्यवाद सर

  3. Deep Patel

    बहुत सुंदर।

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